रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
सूखा नशा
मिर्चपुर के दलित आज भी कर रहे एक अदना सा घर का इन्तजार
कल्याणी ठाकुर चरल: बंगाल का दलित स्वर
कभी सूख नहीं पायेंगे रोहित वेमुला की माँ के आंसू
घरेलू कामगार महिलाओं की दीदी: संगीता सुभाषिणी
पुस्तक मेले की 'मानुषी' से गायब गैरद्विज स्त्री
पूर्ण शराबबंदी के लिए प्रतिबद्ध वड़ार समाज की बेटी संगीता पवार
दलित महिला उद्यमिता को संगठित कर रही हैं सागरिका
मिथक और स्त्री आंदोलन का अगला चरण
नाच एक संवेदनशील उपन्यास