ग्रामीण बिहार में “सूखा नशा” का बढ़ता जाल: 10 वर्षों से उभरता एक सामाजिक आपदा
होना चाहती हूं मूक इतिहास की बोली: बापू टावर (पटना) में मुखरित हुआ स्त्री स्वर
हंस ब्राह्मणवाद के यम ही नहीं,डाइवर्सिटी आंदोलन के स्तम्भ भी रहे!
“धरती भर आकाश” में स्त्री शिक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता का प्रतिरोध
सामाजिक न्याय की विरासत को बचाओ यारो
पश्चिम बनाम पूरब, यूरोप बनाम भारत, अंग्रेज़ी बनाम हिंदी, राजनीति बनाम संस्कृति, वर्ग बनाम अस्मिता – नए विमर्शों का समायोजन
हां मुझे फर्क पड़ता है…
एको एको जिंदगी, खुल के जिवांगें
अमृता प्रीतम की पिंजर: पुरुष पात्र रशीद के अनैतिक से नैतिक बनने के प्रयास की यात्रा
सिक्स पैक सीता
नारी अस्मिता के वृत की त्रिज्याएं , चुनौतियां एवं संभावनाएं
मेरे भीतर की स्त्री
स्त्री सुन्दरता के नये पैमाने : आत्ममुग्धता से आत्मकुंठा तक