ग्रामीण बिहार में “सूखा नशा” का बढ़ता जाल: 10 वर्षों से उभरता एक सामाजिक आपदा
होना चाहती हूं मूक इतिहास की बोली: बापू टावर (पटना) में मुखरित हुआ स्त्री स्वर
हंस ब्राह्मणवाद के यम ही नहीं,डाइवर्सिटी आंदोलन के स्तम्भ भी रहे!
“धरती भर आकाश” में स्त्री शिक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता का प्रतिरोध
रांची में अगस्त की वो रातें जब लोगों के सिर पर सवार था खून… HEC में बन रहे थे चाकू, खंजर और भाला..
क्या आप नेमरा गए ?
दिशोम गुरु को नेमरा में यूं मिली अंतिम विदाई! नेमरा से लौटकर
हिंदी सिनेमा में बाबा साहेब अम्बेडकर की वैचारिकी
प्रधानमंत्री का ‘अधूरा सच’ व संवैधानिक इतिहास, संवैधानिकता और भारतीय संविधान
क्या हो रहा है महिलाओं का राजनीतिकरण!
प्रचलित बायनरी नैरेटिव से अलग दलित राजनीति : इतिहास और चुनावी वर्तमान
जगजीवनराम के बारे में कई भ्रांतियां तोड़ती है यह किताब
स्त्री सुन्दरता के नये पैमाने : आत्ममुग्धता से आत्मकुंठा तक