लोक से विश्व तक गूंजती छत्तीसगढ़ की धड़कन अब खामोश: तीजन बाई
रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
‘‘….एण्ड सन्स’’ का कपटतंत्र और एक चिरविस्थापित: वैश्वीकृत भारत में स्त्री के सम्पदा अधिकार ( पहली क़िस्त)
महिला आरक्षण विधेयक को पारित करो [अपील पर हस्ताक्षर करें ]
12वीं लोकसभा में महिला आरक्षण पर बहस ( 8 मार्च )
महिलाओं दलितों के खिलाफ है इनका राष्ट्रवाद : अपराजिता राजा
बहुजन सांस्कृतिक आगाज : महिषासुर शहादत दिवस
स्मृति इरानी जी, हमारी दुर्गा आप ही हो !
कंडोम- राष्ट्रवाद, जे एन यू और गार्गी का मस्तक
इस राष्ट्रवाद की भाषा में स्त्रियाँ ‘ रंडी’, ‘रखैल’ और बलात्कार से ठीक की जाने वाली बिगडैलें हैं
सूखा नशा