लोक से विश्व तक गूंजती छत्तीसगढ़ की धड़कन अब खामोश: तीजन बाई
रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
बेहाल गाँव, बेहाल बेटियां , गायब पौधे… धरहरा , जहाँ बेटी पैदा होने पर नहीं लग पाते हैं पेड़ : सुशासन का सच
प्रसंग : मोदी और दलित
सूखा नशा