एनडीए के राज में सुरक्षित नहीं हैं महिलाएं
‘रजत रानी मीनू’ की कविताओं में स्त्री – रुपक कुमार
नीतिशा खलखो की कविताएं
‘गूज बम्प्स’
समाज में 15 प्रतिशत लोग ही सभी क्षेत्रों में अपना एकाधिकार जमाये हुए हैं: जीतनराम मांझी
हां मुझे फर्क पड़ता है…
एको एको जिंदगी, खुल के जिवांगें
लेखक संगठन (प्रलेस) ने स्त्री अस्मिता पर मर्द दरोगा को दी तरजीह
ये भागी हुई लड़कियाॅं ..!
बोल्गा से गंगा, तुम्हारी क्षय हो के रचयिता ने दी समाज को नई उर्जा: प्रेम कुमार मणि
पटना में याद की गयीं रमणिका गुप्ता
समकालीन महिला लेखन को संबोधित संगोष्ठी
बेटी दिवस पर विशेष : संजना तिवारी की कविताएं