रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
सूखा नशा
‘‘….एण्ड सन्स’’ का कपटतंत्र और एक चिरविस्थापित: वैश्वीकृत भारत में स्त्री के सम्पदा अधिकार ( पहली क़िस्त)
औरत , विज्ञापन और बाजार
किसान महिलाओं को विशेष अवसर दिये जायें
कृषि प्रधान देश में महिला खेतिहर की दैन्य वास्तविकता
क्रान्ति के कपड़े
दिल्ली में नाइजीरियन यौन- दासियाँ
नाच एक संवेदनशील उपन्यास