दोहरी सियासत का शिकार फ़िलिस्तीन
“श्वेत पर्दे पर श्याम और उनकी ‘सुसमन ’ (The Essence)
पोस्ट ट्रुथ के दौर में युवाओं (जेन Z) के आंदोलन : कुछ सवाल, कुछ जवाब
सतीश सरदाना का कहानी-संग्रह ‘चोखा दाम’ मनुष्य, बाज़ार और स्मृति
‘‘….एण्ड सन्स’’ का कपटतंत्र और एक चिरविस्थापित: वैश्वीकृत भारत में स्त्री के सम्पदा अधिकार ( पहली क़िस्त)
औरत , विज्ञापन और बाजार
किसान महिलाओं को विशेष अवसर दिये जायें
कृषि प्रधान देश में महिला खेतिहर की दैन्य वास्तविकता
क्रान्ति के कपड़े
दिल्ली में नाइजीरियन यौन- दासियाँ
‘प्रगतिशील सिनेमा’ प्रेमचंद का अधूरा सपना