दोहरी सियासत का शिकार फ़िलिस्तीन
“श्वेत पर्दे पर श्याम और उनकी ‘सुसमन ’ (The Essence)
पोस्ट ट्रुथ के दौर में युवाओं (जेन Z) के आंदोलन : कुछ सवाल, कुछ जवाब
सतीश सरदाना का कहानी-संग्रह ‘चोखा दाम’ मनुष्य, बाज़ार और स्मृति
जीएसटी इम्पैक्ट: क्या महिलायें भेजेंगी वित्त मंत्री और प्रधानमंत्री को सैनिटरी पैड (!)
वायरल वीडियो और हिंसक-अश्लील ऐशट्रे के बहाने
औरत के मुंह में पेशाब करने और उसकी वजाइना में सिगरेट बुझाने में कौन सा आनंद मिलता है?
अभी तक रॉड, तेज़ाब, मोमबत्ती और अब औरत के गुप्तांग में सिगरेट भी: सोशल मीडिया में आक्रोश
जजिया कर से भी ज्यादा बड़ी तानाशाही है लहू पर लगान
मीडिया से मजदूर गायब, सेक्सी माडल्स बिल्डिंग बना रहे हैं !
इक्कीसवीं सदी का कचरा यानी टिक टिक करता टाइम बम
ग्रामीण महिलाओं के श्रम का राजनीतिक अर्थशास्त्र
‘प्रगतिशील सिनेमा’ प्रेमचंद का अधूरा सपना