‘रजत रानी मीनू’ की कविताओं में स्त्री – रुपक कुमार
नीतिशा खलखो की कविताएं
‘गूज बम्प्स’
बेटी दिवस पर विशेष : संजना तिवारी की कविताएं
*‘मिस टनकपुर हाजिर हो’ : यथार्थवादी कॉमेडी
स्त्रियों ने रंगमंच की भाषा और प्रस्तुति को बदला: त्रिपुरारी शर्मा
‘निल बट्टे सन्नाटा’ और घरेलू कामगार महिलायें
बलात्कार पर नजरिया और सलमान खान
फैंड्री : एक पत्थर जो हमारे सवर्ण जातिवादी दिलों में धंस गया है
प्रेम अब भी एक सम्भावना है, ‘सैराट’
‘महिषासुर और दुर्गा’ प्रसंग: लोकशायर संभाजी से बातचीत
नादिया अली का सेक्सुअल क्रूसेड
“मैं अभागा सुअर हूं”