गैंगस्टर माँ का साया और एक आज़ाद बेटी की परवाज़
परायों की गली में नितांत अकेला कुशवाहा सम्राट (चौधरी) !
प्रतीकों की लड़ाई: महिष दसरा, वर्चस्व का इतिहास और सत्ता का मौन
फिल्मों में स्त्री-भूमिका के प्रश्न “भूमिका” फ़िल्म के सन्दर्भ में
निराला की कविता में स्त्री मुक्ति का स्वर
मै ही हूँ मैला आंचल में डाक्टर ममता: लतिका
किसलय पंचोली की कविताएं
रीतिकाल में स्त्रीं-यौनिकता का सवाल उर्फ देह अपनी बाकी उनका
प्यार में टूटी सीमोन का खत प्रेमी के नाम
औरत को डायन और पागल ठहराने के पीछे
अत्याचार का ‘अस्वीकार’ है फूलन की क्रांति-गाथा
माँ तुम्हारे कॉमरेड
ऐतिहासिक और अमिट है समाजवाद की वैचारिक धारा वरसी जी स्मृति समारोह में वक्ताओं की राय