गैंगस्टर माँ का साया और एक आज़ाद बेटी की परवाज़
परायों की गली में नितांत अकेला कुशवाहा सम्राट (चौधरी) !
प्रतीकों की लड़ाई: महिष दसरा, वर्चस्व का इतिहास और सत्ता का मौन
फिल्मों में स्त्री-भूमिका के प्रश्न “भूमिका” फ़िल्म के सन्दर्भ में
देह का स्त्रीवादी पाठ और मित्रो मरजानी
नील नीले रंग के
यू पी एस सी में स्त्रीकाल
ग्रामीण महिलाओं के श्रम का राजनीतिक अर्थशास्त्र
नादिया अली का सेक्सुअल क्रूसेड
मन्दिर प्रवेश के लिए यह कैसा संघर्ष ( !)
कंगना, गैंगस्टर और गुलशन की भाषा बनाम फिल्म जगत का मर्दवाद
केरल हरियाणा नहीं है, एर्नाकुलम दिल्ली नहीं , और जिशा ……
ऐतिहासिक और अमिट है समाजवाद की वैचारिक धारा वरसी जी स्मृति समारोह में वक्ताओं की राय