गैंगस्टर माँ का साया और एक आज़ाद बेटी की परवाज़
परायों की गली में नितांत अकेला कुशवाहा सम्राट (चौधरी) !
प्रतीकों की लड़ाई: महिष दसरा, वर्चस्व का इतिहास और सत्ता का मौन
फिल्मों में स्त्री-भूमिका के प्रश्न “भूमिका” फ़िल्म के सन्दर्भ में
तुम मेरे साथ रहो मेंरे कातिल मेरे दिलदार
नाम जोती था मगर वे ज्वालामुखी थे
विमर्श की ज़रुरत कहाँ
है मुझको जमशेद तेरे जाम से भी काम…..!!
शास्त्रीय सुरों की मल्लिका जिन्हें जनता ने ‘गानसरस्वती ‘ नाम दिया
स्त्री-पुरुष अलग-अलग प्रांत नहीं
‘अनारकली आॅफ आरा’ : आंसुओं से उपजी आग और भरोसे की उम्मीद
सॉफ्ट पोर्न नहीं: ये मध्यवर्गीय स्त्री की कामनाओं के नोट्स हैं
ऐतिहासिक और अमिट है समाजवाद की वैचारिक धारा वरसी जी स्मृति समारोह में वक्ताओं की राय