आजादी के आंदोलन में आम लोगों की हिस्सेदारी रेखांकित करना: नाटक
आवाज़
‘सोनिया और राजीव’ ‘मेलोनी और मोदी’
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद नहीं, लोकतान्त्रिक राष्ट्रवाद को मजबूत करने की जरूरत है: अनिता भारती
भिखारी ठाकुर की तुलना शेक्सपियर से करना भिखारी ठाकुर का अपमान है
#MeToo (मीटू) ने औरतों को विरोध की भाषा दी: मेरा रंग के दूसरे वार्षिक समारोह में पैनल-चर्चा और काव्य पाठ
सिर्फ चीत्कार और उच्छ्वास ही लेखन नहीं है: ममता कालिया
हैप्पी बड्डे #MeToo: एक साल का हुआ मीटू अभियान: कितना असर-कितना बेअसर!
‘यौन हिंसा के सन्दर्भ में लज्जित करने की रणनीति’ (यशपाल के झूठा-सच में)
मीटू, यूटू: चुप हो तो बोलो, बोलने से उनका मनोबल टूटता है
मी टू कैंपेन से जुड़े कुछ सवाल, शंकाएं और भविष्य का भारत
तनुश्री के खिलाफ राखी सावंत और सबरीमाला-आंदोलन की महिलाओं के खिलाफ भक्तिनें
स्त्री भागीदारी पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी: उपलब्धियों के साथ नई चुनौतियों पर जोर