आजादी के आंदोलन में आम लोगों की हिस्सेदारी रेखांकित करना: नाटक
आवाज़
‘सोनिया और राजीव’ ‘मेलोनी और मोदी’
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद नहीं, लोकतान्त्रिक राष्ट्रवाद को मजबूत करने की जरूरत है: अनिता भारती
मनुष्य – आदिम मनुष्य भी – प्राकृतिक नहीं, सांस्कृतिक प्राणी है : अर्चना वर्मा
प्रेमरिक्त दैहिक सम्बन्ध निस्संदेह अनैतिक होते हैं : कात्यायनी
नरेन्द्र मोदी से नहीं मिलना चाहती है कलावती
परिवार टूटे, यह न स्त्री चाहती है और न पुरुष
अपराधबोध और हीनभावना से रहित होना ही मेरी समझ में स्त्री की शुचिता है
अमानवीय और क्रूर प्रथायें स्त्री को अशक्त और गुलाम बनाने की कवायद हैं
वह हमेशा रहस्यमयी आख्यायित की गयी
आख़िर हम भी तो इंसान ही हैं, हमें भी दर्द होता है : रवीना बरीहा
स्त्री भागीदारी पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी: उपलब्धियों के साथ नई चुनौतियों पर जोर