गैंगस्टर माँ का साया और एक आज़ाद बेटी की परवाज़
परायों की गली में नितांत अकेला कुशवाहा सम्राट (चौधरी) !
प्रतीकों की लड़ाई: महिष दसरा, वर्चस्व का इतिहास और सत्ता का मौन
फिल्मों में स्त्री-भूमिका के प्रश्न “भूमिका” फ़िल्म के सन्दर्भ में
जायसी और पद्माकर की नायिकाओं के व्यक्तित्व के सामाजिक पक्ष का तुलनात्मक अध्ययन
हिंदी साहित्य से झाँकतीं आदिवासी स्त्रियाँ
नागार्जुन के उपन्यासों में स्त्री
हिंदी साहित्य में आदिवासी स्त्री का सवाल
बच्चन के पत्रों के बहाने उनकी स्त्रियों की याद
वक्रता का वाग्वैदग्ध्य : नागार्जुन की स्त्री केन्द्रित कवितायें
महिलाओं , महान बनने के सपने देखो: डा.आंबेडकर
‘अन्तरजातीय विवाह से ही सामाजिक विषमता खत्म होगी’
ऐतिहासिक और अमिट है समाजवाद की वैचारिक धारा वरसी जी स्मृति समारोह में वक्ताओं की राय