वह राहुल गांधी से प्यार करती है, हथेलियों में रैक्व की आत्मा है
बागमती किनारे बढ़ती प्यास
“पेड़,पानी और प्रतिबद्धता : विजयपुरा की हरियाली की अद्भुत कहानी”
आस्था का सम्मान
एक बार फिर नाचो न इज़ाडोरा
असीमा भट्ट की कविताएँ
उग्रतारा: प्रेम-क्षेत्र में वैध -अवैध की निरर्थकता
जेंडर और पितृसत्ता पर क्रांतिकारी आंदोलन के नजरिए की एक आलोचना
लूसर
ताकि बोलें वे भी, जो हैं सदियों से चुप
अलकनंदा साने की कविताएं
जितेन्द्र श्रीवास्तव की कविताएँ
‘शतरंज’ की बिसात पर सोशल मीडिया ‘के खिलाड़ी’