वह राहुल गांधी से प्यार करती है, हथेलियों में रैक्व की आत्मा है
बागमती किनारे बढ़ती प्यास
“पेड़,पानी और प्रतिबद्धता : विजयपुरा की हरियाली की अद्भुत कहानी”
आस्था का सम्मान
एक खुली क़िताब जिसे पढ़ना बाकी है
मीरा का काव्य और स्त्री अस्मिता का प्रश्न
आलोक आज़ाद की ‘ईश्वर के बच्चे’ और अन्य कविताएं
‘कुतों के रूपक’ में इंसानियत का प्रतिबिम्ब
गुंजन उपाध्याय पाठक की पाँच कविताएँ
प्रश्नचिह्न
जगजीवनराम के बारे में कई भ्रांतियां तोड़ती है यह किताब
‘बड़े घर की बेटी’ क्लाइमेक्स का पुनर्लेखन
‘शतरंज’ की बिसात पर सोशल मीडिया ‘के खिलाड़ी’