महकार की महागाथा: लोकतंत्र का एक जीवित महाकाव्य है महकार
ग्रामीण बिहार में “सूखा नशा” का बढ़ता जाल: 10 वर्षों से उभरता एक सामाजिक आपदा
होना चाहती हूं मूक इतिहास की बोली: बापू टावर (पटना) में मुखरित हुआ स्त्री स्वर
हंस ब्राह्मणवाद के यम ही नहीं,डाइवर्सिटी आंदोलन के स्तम्भ भी रहे!
समकालीन महिला लेखन को संबोधित संगोष्ठी
नाक की फुरूहुरी: सोनी पांडेय कहानी
‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ उपन्यास में प्रकृति चित्रण
पिंजरे की तीलियों से बाहर आती मैना की कुहुक
राष्ट्रवाद, विश्वविद्यालय और टैंक: संदीप मील की कहानी
बेड़ियाँ: अरविंद जैन की कहानी
क्रूर और हिंसक यथार्थ में प्रेम और करुणा को बचाये रखने की कोशिश है समकालीन स्त्री- कविता
भिखारी ठाकुर की तुलना शेक्सपियर से करना भिखारी ठाकुर का अपमान है
“धरती भर आकाश” में स्त्री शिक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता का प्रतिरोध