महकार की महागाथा: लोकतंत्र का एक जीवित महाकाव्य है महकार
ग्रामीण बिहार में “सूखा नशा” का बढ़ता जाल: 10 वर्षों से उभरता एक सामाजिक आपदा
होना चाहती हूं मूक इतिहास की बोली: बापू टावर (पटना) में मुखरित हुआ स्त्री स्वर
हंस ब्राह्मणवाद के यम ही नहीं,डाइवर्सिटी आंदोलन के स्तम्भ भी रहे!
वर्जिन : जयप्रकाश कर्दम की कहानी (पहली क़िस्त)
वेश्यालय में किस्म-किस्म के लोग आते हैं: विदुषी पतिता की आत्मकथा
स्त्री यौनिकता से भयभीत हिन्दी आलोचना और ‘उर्वशी’
उनकी प्रतिबद्धता हाशिये के लोगों के साथ ताउम्र रही
एक विदुषी पतिता की आत्मकथा: दूसरी क़िस्त
वह आत्मीय और दृष्टिसंपन्न संपादक हमें अलविदा कह गयी
महादेवी-काव्य-संध्या का आयोजन:महादेवी वर्मा के गीतों का गायन और समकालीनों का काव्यपाठ
एक विदुषी पतिता की आत्मकथा
“धरती भर आकाश” में स्त्री शिक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता का प्रतिरोध