महकार की महागाथा: लोकतंत्र का एक जीवित महाकाव्य है महकार
ग्रामीण बिहार में “सूखा नशा” का बढ़ता जाल: 10 वर्षों से उभरता एक सामाजिक आपदा
होना चाहती हूं मूक इतिहास की बोली: बापू टावर (पटना) में मुखरित हुआ स्त्री स्वर
हंस ब्राह्मणवाद के यम ही नहीं,डाइवर्सिटी आंदोलन के स्तम्भ भी रहे!
पंखुरी सिन्हा की कविताएं (घास पटाने के मेरे बूट व अन्य)
कविता की प्रकृति ही है समय से आगे चलना
आबिदा (परिमला अम्बेकर की कहानी)
आम्रपाली ( रेनू यादव की कविताएं)
मध्यवर्गीय कामकाजी स्त्रियों के कशमकश भरी जिंदगी की कविताएं !
आज का स्त्रीलेखन सहज और ज्यादा आत्मविश्वासी है
वर्जिन : जयप्रकाश कर्दम की कहानी (आख़िरी क़िस्त)
मेरी माँ मेरा आदर्श..!
“धरती भर आकाश” में स्त्री शिक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता का प्रतिरोध