गैंगस्टर माँ का साया और एक आज़ाद बेटी की परवाज़
परायों की गली में नितांत अकेला कुशवाहा सम्राट (चौधरी) !
प्रतीकों की लड़ाई: महिष दसरा, वर्चस्व का इतिहास और सत्ता का मौन
फिल्मों में स्त्री-भूमिका के प्रश्न “भूमिका” फ़िल्म के सन्दर्भ में
नीतीश जी,आपकी पुलिस बलात्कारी को बचा रही है.
कभी सूख नहीं पायेंगे रोहित वेमुला की माँ के आंसू
मैं भी हो सकती थी उस दिन यौन हमले की शिकार
यौन हमलावारों से सख्ती से निपटें पीड़िताएं, तभी रुकेंगी बैंगलोर जैसी घटनाएं
हिंसा में कोई मर्दानगी नहीं
देश के किसी नेता में न यह हैसियत है, न हिम्मत की वह तानाशाही लेकर आये: देवीप्रसाद त्रिपाठी
जाति-वर्ग और लिंग के दायरे में चल रहे संघर्षों के साथ जुड़ें : कविता कृष्णन
समाज, संसाधन और संविधान बचाने के लिए एकजुट हों – मेधा पाटकर
ऐतिहासिक और अमिट है समाजवाद की वैचारिक धारा वरसी जी स्मृति समारोह में वक्ताओं की राय