गैंगस्टर माँ का साया और एक आज़ाद बेटी की परवाज़
परायों की गली में नितांत अकेला कुशवाहा सम्राट (चौधरी) !
प्रतीकों की लड़ाई: महिष दसरा, वर्चस्व का इतिहास और सत्ता का मौन
फिल्मों में स्त्री-भूमिका के प्रश्न “भूमिका” फ़िल्म के सन्दर्भ में
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
आवाज़
नीतिशा खलखो की कविताएं
बेटी दिवस पर विशेष : संजना तिवारी की कविताएं
लड़की और चाँद
गीता मलिक की कविताएँ
कविता : “प्रकृति की पुकार”
पुस्तक समीक्षा: जिरहुल-जसिंता केरकेट्टा
ऐतिहासिक और अमिट है समाजवाद की वैचारिक धारा वरसी जी स्मृति समारोह में वक्ताओं की राय