गैंगस्टर माँ का साया और एक आज़ाद बेटी की परवाज़
परायों की गली में नितांत अकेला कुशवाहा सम्राट (चौधरी) !
प्रतीकों की लड़ाई: महिष दसरा, वर्चस्व का इतिहास और सत्ता का मौन
फिल्मों में स्त्री-भूमिका के प्रश्न “भूमिका” फ़िल्म के सन्दर्भ में
द्रौपदी ! भारतीय सेना बलात्कारी नहीं,राष्ट्रवादी है (?!)
‘पिंक’एक आज़ाद-ख्याल औरत की नज़र से
मी लार्ड, स्त्रीवाद का रंग ‘पिंक’ है ! कुछ-कुछ (?) लाल और नीला भी
‘पार्च्ड’ के जवाब , ‘पिंक’ से कुछ सवाल : स्त्रीवाद के आईने में (!)
रंडी अश्लील शब्द है और फक धार्मिक (!) … पिंक के बहाने कुछ जरूरी सवाल
क्यों स्त्रीविरोधी है अतिनाटकीय फिल्म ‘पिंक’ !
पेंटिंग में माँ को खोजते फ़िदा हुसेन
*‘मिस टनकपुर हाजिर हो’ : यथार्थवादी कॉमेडी
ऐतिहासिक और अमिट है समाजवाद की वैचारिक धारा वरसी जी स्मृति समारोह में वक्ताओं की राय