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समसामयिकी

ग्रामीण बिहार में “सूखा नशा” का बढ़ता जाल: 10 वर्षों से उभरता एक सामाजिक आपदा

प्रतिमा कुमारी की ख़ास रिपोर्ट ग्रामीण बिहार के कई इलाकों में बीते कुछ वर्षों से एक खामोश लेकिन भयावह संकट फैल रहा है, जिसे स्थानीय...

होना चाहती हूं मूक इतिहास की बोली: बापू टावर (पटना) में मुखरित हुआ स्त्री स्वर

बायें से ज्योति रीता, चाहत अन्वी, कंचन राय, सुनीता गुप्ता, प्रत्युष मिश्रा, ज्योति स्पर्श, नताशा, गुंजन उपाध्याय

हंस ब्राह्मणवाद के यम ही नहीं,डाइवर्सिटी आंदोलन के स्तम्भ भी रहे!

— एच. एल. दुसाध पुरखे बुद्ध शरण हंस का हमेशा-हमेशा के लिए चले जाना 22 जनवरी की शाम हिंदी पट्टी की आंबेडकरवादी दुनिया स्तब्ध रह गई,...

“धरती भर आकाश” में स्त्री शिक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता का प्रतिरोध

तसनीम पटेल की आत्मकथा : शोध आलेख आत्मकथा धरती भर आकाशमें स्त्री शिक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता का प्रतिरोध अहमद अली शोध सार - हिंदी आत्मकथात्मक साहित्य में...

स्त्री सुन्दरता के नये पैमाने : आत्ममुग्धता से आत्मकुंठा तक

मेट्रो में, बस में, सड़क पर,बाज़ार और यहाँ तक की घर में आप गौर करेंगे तो स्त्री-पुरुष के बीच अप्राकृतिक रूप से सुंदर लगने...

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