बेटियों के लिए
सुबह
किरणों के रथ पर
आती हैं बेटियां
इन्हीं से खुशबू उधार लेकर
फूल बिखेरते हैं खुशबू
बेटियाँ ही कोयल को
सिखलाती हैं तान
जहाँ जन्म लेती हैं ये
बसंत...
कहानी- चंद्रसेन
‘डूड’…
“इस यूनिवर्सिटी का यही झंझट है,” नैना ने बालों के जूड़े में पेन खोंसते हुए बोली,
“इतनी साहित्यिक हिंदी मुझसे नहीं होती…
वो भी ये...
कहानी- चंद्रसेन
‘डूड’…
“इस यूनिवर्सिटी का यही झंझट है,” नैना ने बालों के जूड़े में पेन खोंसते हुए बोली,
“इतनी साहित्यिक हिंदी मुझसे नहीं होती…
वो भी ये...
कहानी- चंद्रसेन
‘डूड’…
“इस यूनिवर्सिटी का यही झंझट है,” नैना ने बालों के जूड़े में पेन खोंसते हुए बोली,
“इतनी साहित्यिक हिंदी मुझसे नहीं होती…
वो भी ये...
बेटियों के लिए
सुबह
किरणों के रथ पर
आती हैं बेटियां
इन्हीं से खुशबू उधार लेकर
फूल बिखेरते हैं खुशबू
बेटियाँ ही कोयल को
सिखलाती हैं तान
जहाँ जन्म लेती हैं ये
बसंत...
कहानी- चंद्रसेन
‘डूड’…
“इस यूनिवर्सिटी का यही झंझट है,” नैना ने बालों के जूड़े में पेन खोंसते हुए बोली,
“इतनी साहित्यिक हिंदी मुझसे नहीं होती…
वो भी ये...