स्वर की बहुरंगी विरासत और स्त्री-अभिव्यक्ति की स्वतंत्र आवाज़
एनडीए के राज में सुरक्षित नहीं हैं महिलाएं
‘रजत रानी मीनू’ की कविताओं में स्त्री – रुपक कुमार
नीतिशा खलखो की कविताएं
दलित कहानियों में संवेदनात्मक पक्ष, परिवर्तन और दिशा
कमला: मौत एक क्रमिक आत्म(हत्या)
अस्सी प्रतिशत स्त्रियों की कथा
पीढ़ा घिसता है तो पीढ़ी बनती है
तनाव-क्षेत्र में महिलाओं को नज़रअंदाज करने से समाज का नुकसान
भारतीय पुलिस-तंत्र में महिलाओं की स्थिति: ‘गुनाह-बेगुनाह’ उपन्यास के विशेष सन्दर्भ में- केएम प्रतिभा
महिलाओं और अन्य आदिवसियों पर मणिपुर में हिंसा के खिलाफ स्त्रीवादियों का प्रस्ताव
मदर इंडिया: एक संघर्षरत भारतीय स्त्री की अमर कथा
‘गूज बम्प्स’