स्वर की बहुरंगी विरासत और स्त्री-अभिव्यक्ति की स्वतंत्र आवाज़
एनडीए के राज में सुरक्षित नहीं हैं महिलाएं
‘रजत रानी मीनू’ की कविताओं में स्त्री – रुपक कुमार
नीतिशा खलखो की कविताएं
‘यौन हिंसा के सन्दर्भ में लज्जित करने की रणनीति’ (यशपाल के झूठा-सच में)
मीटू, यूटू: चुप हो तो बोलो, बोलने से उनका मनोबल टूटता है
मी टू कैंपेन से जुड़े कुछ सवाल, शंकाएं और भविष्य का भारत
तनुश्री के खिलाफ राखी सावंत और सबरीमाला-आंदोलन की महिलाओं के खिलाफ भक्तिनें
हिंदी साहित्य में आदिवासी महिलाओं का योगदान
लहू की अपवित्रता को संवैधानिक झटका: सबरीमाला मंदिर में महिलाएं कर सकती हैं प्रवेश
काश ! ऐसी पत्नियाँ, बहनें समाज का अधिकतम सच हो जायें!
बीएचयू में लड़कियों की आवाज से क्यों परेशान होते हैं दक्षिणपंथी (?)
‘गूज बम्प्स’