ग्रामीण बिहार में “सूखा नशा” का बढ़ता जाल: 10 वर्षों से उभरता एक सामाजिक आपदा
होना चाहती हूं मूक इतिहास की बोली: बापू टावर (पटना) में मुखरित हुआ स्त्री स्वर
हंस ब्राह्मणवाद के यम ही नहीं,डाइवर्सिटी आंदोलन के स्तम्भ भी रहे!
“धरती भर आकाश” में स्त्री शिक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता का प्रतिरोध
साम्प्रदायिक हिंसा से अलग तासीर है मॉब लींचिंग की
समकालीन हिन्दी-उर्दू कथा साहित्य में मुस्लिम स्त्रियाँ: संघर्ष और समाधान
छायावादी कविता में पितृसत्तात्मक अभिव्यक्ति
आदिवासी स्त्री जिसे मीडिया प्रस्तुत नहीं करती है
देहसत्ता का रहस्य ( दूसरी क़िस्त)
देहसत्ता का रहस्य (पहली क़िस्त)
महिला पत्रकारों पर बढ़ रहे हमले, जेएनयू प्रदर्शन के दौरान भी पुलिस की बदसुलूकी
मर्दोत्सव और स्त्रीविलाप बीच होलिका का लोकमिथ
स्त्री सुन्दरता के नये पैमाने : आत्ममुग्धता से आत्मकुंठा तक