स्वर की बहुरंगी विरासत और स्त्री-अभिव्यक्ति की स्वतंत्र आवाज़
एनडीए के राज में सुरक्षित नहीं हैं महिलाएं
‘रजत रानी मीनू’ की कविताओं में स्त्री – रुपक कुमार
नीतिशा खलखो की कविताएं
बिहार और जातिवाद का इतिहास ‘दिनकर’ की कलम से:
1990 के बाद का हिंदी समाज और अद्विज हिंदी लेखन
हिन्दी साहित्य में अस्मितामूलक विमर्श विशेष संदर्भःस्त्री अस्मिता
देश के मर्दों एक होओ
जाति पर डाका : हिंदी साहित्य में जातिविमर्श
पेंटिंग में माँ को खोजते फ़िदा हुसेन
यौन हिंसा और न्याय की मर्दवादी भाषा:- आख़िरी क़िस्त
उपभोक्तावादी आधुनिकता की आजादी के बीच स्त्री
‘गूज बम्प्स’