ग्रामीण बिहार में “सूखा नशा” का बढ़ता जाल: 10 वर्षों से उभरता एक सामाजिक आपदा
होना चाहती हूं मूक इतिहास की बोली: बापू टावर (पटना) में मुखरित हुआ स्त्री स्वर
हंस ब्राह्मणवाद के यम ही नहीं,डाइवर्सिटी आंदोलन के स्तम्भ भी रहे!
“धरती भर आकाश” में स्त्री शिक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता का प्रतिरोध
सरोगेसी (विनियमन) विधेयक का बहिष्कारी चरित्र
ट्रोजन की औरतें’ एवं ‘स्त्री विलाप पर्व
बीबीसी में जातिगत भेदभाव (आरोप)
लेखक संगठनों को समावेशी बनाने के सुझाव के साथ आगे आये लेखक: प्रलेस से की पहल की मांग
कश्मीर के आईने में शेष भारत का विकास और मर्दवादी चेहरा
वैवाहिक बलात्कार और हिंसा: एक अध्ययन
लेखिका ने गिनाये प्रगतिशील लेखक संघ के महिला विरोधी निर्णय: संघ सेक्सिस्ट पुलिसवाले के आगे नतमस्क
लेखक संगठन (प्रलेस) ने स्त्री अस्मिता पर मर्द दरोगा को दी तरजीह
स्त्री सुन्दरता के नये पैमाने : आत्ममुग्धता से आत्मकुंठा तक