गैंगस्टर माँ का साया और एक आज़ाद बेटी की परवाज़
परायों की गली में नितांत अकेला कुशवाहा सम्राट (चौधरी) !
प्रतीकों की लड़ाई: महिष दसरा, वर्चस्व का इतिहास और सत्ता का मौन
फिल्मों में स्त्री-भूमिका के प्रश्न “भूमिका” फ़िल्म के सन्दर्भ में
भारतीय संतों के हमेशा कुंडलिनी जागरण की तरह हमेशा सेक्स की समस्याओं में उलझे रहने वालों पर भी मैं अविश्वास करता हूं: लेनिन
लेनिन: कम्युनिस्ट नेतृत्व महिलाओं के आन्दोलन के सवाल पर निराशावादी, रुको और देखो वाला रुख अपना लेता है
विष्णु जी, ब्राहमणवाद से हमारी लड़ाई जारी रहेगी !
एक क्रांतिकारी की पत्नी का आत्मकथ्य
ऐतिहासिक और अमिट है समाजवाद की वैचारिक धारा वरसी जी स्मृति समारोह में वक्ताओं की राय