महकार की महागाथा: लोकतंत्र का एक जीवित महाकाव्य है महकार
ग्रामीण बिहार में “सूखा नशा” का बढ़ता जाल: 10 वर्षों से उभरता एक सामाजिक आपदा
होना चाहती हूं मूक इतिहास की बोली: बापू टावर (पटना) में मुखरित हुआ स्त्री स्वर
हंस ब्राह्मणवाद के यम ही नहीं,डाइवर्सिटी आंदोलन के स्तम्भ भी रहे!
आए बड़े पढ़े-लिखे इंसाफ़ज़ादे व अन्य कविताएं (कवयित्री: वीना)
वे सख्त दिल मह्बूब: सफ़र के क़िस्से
औरतें उठी नहीं तो जुल्म बढ़ता जायेगा (भारती वत्स) की कविताएं
भारतेन्दु हरिश्चंद्र की पत्रकारिता और स्त्री-मुक्ति के प्रश्न
‘लिखो इसलिए’ व श्रीदेवी की अन्य कविताएं
मैं अमर बेल को गाली नहीं देता और अन्य कविताएं (कवि:एस एस पंवार)
“केदारनाथ सिंह की कविताओं में स्त्री”
औरतें अपने दु:ख की विरासत किसको देंगी
“धरती भर आकाश” में स्त्री शिक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता का प्रतिरोध