महकार की महागाथा: लोकतंत्र का एक जीवित महाकाव्य है महकार
ग्रामीण बिहार में “सूखा नशा” का बढ़ता जाल: 10 वर्षों से उभरता एक सामाजिक आपदा
होना चाहती हूं मूक इतिहास की बोली: बापू टावर (पटना) में मुखरित हुआ स्त्री स्वर
हंस ब्राह्मणवाद के यम ही नहीं,डाइवर्सिटी आंदोलन के स्तम्भ भी रहे!
लल द्यद की काश्मीरी वाख कविता
पुष्पा गोस्वामी की कवितायें
उदय प्रकाश की कवितायें
स्त्री विमर्श की पठनीय किताबें
पवन करण की पांच कवितायें
जीना जिन्दगी को आत्मकथा के नजरिये से -अंतिम किश्त
जीना ज़िन्दग़ी को आत्मकथा के नज़रिये से – पहली किश्त
फूटते पेट वाली औरत और मर्दवाद
“धरती भर आकाश” में स्त्री शिक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता का प्रतिरोध