महकार की महागाथा: लोकतंत्र का एक जीवित महाकाव्य है महकार
ग्रामीण बिहार में “सूखा नशा” का बढ़ता जाल: 10 वर्षों से उभरता एक सामाजिक आपदा
होना चाहती हूं मूक इतिहास की बोली: बापू टावर (पटना) में मुखरित हुआ स्त्री स्वर
हंस ब्राह्मणवाद के यम ही नहीं,डाइवर्सिटी आंदोलन के स्तम्भ भी रहे!
कुछ अल्पविराम
ट्रोजन की औरतें’ एवं ‘स्त्री विलाप पर्व
‘कागज पर लगाए गए पेड़’ सी जीवंत कविताएँ
अपराधी हूँ मैं और अन्य कविताएँ
भवसागर के उस पार मिलना पियारे हरिचंद ज्यू
ग्राम्य जीवन का दस्तावेज़ :चिरकुट दास चिन्गारी
नोबेल पुरस्कार जीतने वाली पहली अफ्रीकी-अमेरिकी महिला–टोनी मॉरिसन
हव्वा की बेटियों का ख़्वाब है ‘दूसरी जन्नत’/नासिरा शर्मा
“धरती भर आकाश” में स्त्री शिक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता का प्रतिरोध