‘कामायनी’ और ‘उर्वशी’ : आधुनिक मनुष्य की त्रासदी और मुक्ति-चेतना का आख्यान
बापू टावर में सवर्ण वर्चस्व का नंगा नाच
लोक से विश्व तक गूंजती छत्तीसगढ़ की धड़कन अब खामोश: तीजन बाई
रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
स्त्रीकाल (अक्टूबर-दिसंबर) पढ़ें नॉटनल पर
स्त्रीकाल : स्त्रीवादी चिंतन का आर्काइव
स्त्रीकाल -अंक 8
स्त्रीकाल -अंक 6
स्त्री काल, अंक – 9
स्त्रीकाल अंक – 9: दलित स्त्रीवाद
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’