डॉ. तीजन बाई छत्तीसगढ़ की एक विश्व प्रसिद्ध पंडवानी लोक गायिका थीं, जिन्होंने इस पारंपरिक कला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई और विशिष्ट पहचान दिलाई। पंडवानी में वाद्य यंत्रों के साथ संगीत और जीवंत अभिनय के माध्यम से महाभारत की कहानियों को सुनाया जाता है। लंबी बीमारी के बाद 5 जुलाई 2026 को 70 वर्ष की आयु में रायपुर एम्स (AIIMS) में उनका निधन हो गया।
तीजन बाई ने कभी कोई औपचारिक स्कूली शिक्षा प्राप्त नहीं की थी। इसके बावजूद पंडवानी कला को वैश्विक स्तर पर ले जाने के उनके इसी हुनर और लगन को देखते हुए उन्हें यह सर्वोच्च शैक्षणिक सम्मान दिया गया, जिसके बाद से उनके नाम के आगे सम्मानपूर्वक ‘डॉक्टर’ लगाया जाने लगा। तीजन बाई को कला और लोक संस्कृति के क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए वर्ष 2017 में छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ (खैरागढ़ म्यूजिक यूनिवर्सिटी) सहित देश के करीब चार अलग-अलग विश्वविद्यालयों द्वारा मानद डॉक्टरेट की उपाधि से नवाजा गया था।
हिंदी और लोक-साहित्य के कई शोधार्थियों द्वारा उनके लोक-नाट्य प्रदर्शन (पंडवानी), उनकी कापालिक शैली, और उनके द्वारा महाभारत की कथाओं को जीवंत करने की कला पर कई M.Phil और Ph.D स्तर के शोधग्रंथ लिखे गए हैं।

पंडवानी (Pandavani): यह महाभारत की कथाओं पर आधारित एकल नाट्य-गायन है।इसमें तंबूरा: कला की जान है यह बहुउपयोगी वाद्य यंत्र: पंडवानी कलाकार के हाथ में एक तंबूरा (या इकतारा) होता है, जो केवल एक संगीत वाद्य नहीं है। रूप बदलने वाला औजार: कहानी के दौरान कलाकार अपनी शारीरिक भाव-भंगिमाओं से उस तंबूरे को कभी भीम की गदा, कभी अर्जुन का धनुष, कभी द्रौपदी के बाल, तो कभी दुशासन की तलवार बना देता है।गायन की दो शैलियां वेदमती शैली (Vedmati Style): इसमें कलाकार मंच पर बैठकर शांत भाव से, शास्त्रों के अनुसार शुद्ध छत्तीसगढ़ी में महाभारत की कथा गाता है। कापालिक शैली (Kapalik Style): इसमें कलाकार मंच पर खड़े होकर, कूदकर और आक्रामक अभिनय के साथ कहानी सुनाता है। तीजन बाई पहली महिला हैं जिन्होंने इसी शैली को अपनाकर इसे पूरी दुनिया में प्रसिद्ध किया।

तीजन बाई को देश-विदेश में उनकी कला के लिए सर्वोच्च सम्मान प्राप्त हुए-
पद्म श्री (1988): भारत सरकार द्वारा दिया जाने वाला चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान।संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (1995): भारत की राष्ट्रीय संगीत, नृत्य और नाटक अकादमी द्वारा दिया गया प्रतिष्ठित सम्मान।
पद्म भूषण (2003): कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए देश का तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान।
एमएस सुब्बुलक्ष्मी शताब्दी पुरस्कार (2016): शास्त्रीय और लोक संगीत में अद्वितीय योगदान के लिए।
फुकुओका पुरस्कार (2018): कला और संस्कृति के क्षेत्र में दिया जाने वाला जापान का प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार।
पद्म विभूषण (2019): भारत सरकार द्वारा दिया जाने वाला दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान। तीजन बाई छत्तीसगढ़ की पहली महिला कलाकार हैं जिन्हें इस सम्मान से नवाजा गया था।
स्रोत : गूगल
