स्वर की बहुरंगी विरासत और स्त्री-अभिव्यक्ति की स्वतंत्र आवाज़
एनडीए के राज में सुरक्षित नहीं हैं महिलाएं
‘रजत रानी मीनू’ की कविताओं में स्त्री – रुपक कुमार
नीतिशा खलखो की कविताएं
पोवाडा : वीर रस की मराठी कविता ( दलित परंपरा )
‘‘अनाघ्रातम पुष्पम, असूर्यंपश्या से रमणेषु रम्भा तक’’
‘अर्थ स्वातंत्र्य ’ स्त्री मुक्ति की पूर्व शर्त
वैचारिक और घरेलू पत्रिकाओं में स्त्री मानसिकता का निर्माण
इतिहास के आईने में महिला आंदोलन
हिंदी भाषा में स्त्री-विमर्श
निराला की कविता में स्त्री मुक्ति का स्वर
रीतिकाल में स्त्रीं-यौनिकता का सवाल उर्फ देह अपनी बाकी उनका
‘गूज बम्प्स’