दोहरी सियासत का शिकार फ़िलिस्तीन
“श्वेत पर्दे पर श्याम और उनकी ‘सुसमन ’ (The Essence)
पोस्ट ट्रुथ के दौर में युवाओं (जेन Z) के आंदोलन : कुछ सवाल, कुछ जवाब
सतीश सरदाना का कहानी-संग्रह ‘चोखा दाम’ मनुष्य, बाज़ार और स्मृति
जाति, जेंडर और क्लास दलित स्त्रीवाद की धूरि
वे कुन्तियाँ नहीं गौरव से भरी माँ हैं
शिक्षा में जातिगत और लिंगगत असमानता
प्रेमचंद का साहित्य और दलित स्त्री
राजेंद्र यादव के अंतर्विरोध , हंस और दलित स्त्री अस्मिता के सवाल
एक साक्षात्कार लंबाणी जनजाति की स्त्रियों से
दलित स्त्रीवाद जैसी कोई अवधारणा नहीं है : तेजसिंह
फैंसी स्त्रीवादी आयोजनों में जाति मुद्दों की उपेक्षा
‘प्रगतिशील सिनेमा’ प्रेमचंद का अधूरा सपना