रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
सूखा नशा
जाति, जेंडर और क्लास दलित स्त्रीवाद की धूरि
वे कुन्तियाँ नहीं गौरव से भरी माँ हैं
शिक्षा में जातिगत और लिंगगत असमानता
प्रेमचंद का साहित्य और दलित स्त्री
राजेंद्र यादव के अंतर्विरोध , हंस और दलित स्त्री अस्मिता के सवाल
एक साक्षात्कार लंबाणी जनजाति की स्त्रियों से
दलित स्त्रीवाद जैसी कोई अवधारणा नहीं है : तेजसिंह
फैंसी स्त्रीवादी आयोजनों में जाति मुद्दों की उपेक्षा
नाच एक संवेदनशील उपन्यास