शिवम् अवस्थी की कविताएँ और ग़ज़ल
‘द सेकंड सोच’: कटी हुई जुबानों के बीच सच का परचम
फ़िलिस्तीन : एक नया कर्बला – नासिरा शर्मा
व्यावसायिक जोखिम का लैंगिक विमर्श
एक ‘अच्छी औरत’, स्मृति ईरानी के पक्ष में ( खुला ख़त , सेवा में जिनसे संबंधित हो)
नंदलाला के लिए होली और गोपियों के लिए गाली : होली के बहाने स्त्रियों की यौनिकता पर प्रहार
होली पर पिंजडा खोलो ऋचा : अनुपम सिंह की चिट्ठी
विज्ञान के क्षेत्र में लडकियां क्यों कम हैं ?
पवित्र आराधना स्थल और अपवित्र महिलाएं
क्या मैं अंदर आ सकती हूं , भगवन् !
धर्म और स्त्री
पूर्ण लोकतंत्र की स्थापना : एक किताब,एक पहल