वह राहुल गांधी से प्यार करती है, हथेलियों में रैक्व की आत्मा है
बागमती किनारे बढ़ती प्यास
“पेड़,पानी और प्रतिबद्धता : विजयपुरा की हरियाली की अद्भुत कहानी”
आस्था का सम्मान
प्रेमचंद का साहित्य और दलित स्त्री
राजेंद्र यादव के अंतर्विरोध , हंस और दलित स्त्री अस्मिता के सवाल
एक साक्षात्कार लंबाणी जनजाति की स्त्रियों से
दलित स्त्रीवाद जैसी कोई अवधारणा नहीं है : तेजसिंह
फैंसी स्त्रीवादी आयोजनों में जाति मुद्दों की उपेक्षा
डॉ. अम्बेडकर का मूल चिंतन है स्त्री चिंतन
डा0 अम्बेडकर और स्त्री अधिकार – सुजाता पारमिता
दलित स्त्री आंदोलन तथा साहित्य- अस्मितावाद से आगे
‘शतरंज’ की बिसात पर सोशल मीडिया ‘के खिलाड़ी’