रिपब्लिकन पार्टी का 69वाँ स्थापना दिवस
भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने संवैधानिक लोकतंत्र को मजबूत करने के दृष्टिकोण से जनता के लिए जो खुला पत्र जारी किया था, उसमें सभी स्तरों पर सरकार को जवाबदेह बनाने और संवैधानिक व्यवस्था स्थापित करने के लिए रिपब्लिकन पार्टी की, एक विपक्षी शक्ति के रूप में, आवश्यकता को रेखांकित किया था। इसी संदर्भ में रिपब्लिकन पार्टी को आत्मचिंतन करना चाहिए और पार्टी को सक्षम बनाने के लिए स्थापना दिवस के अवसर पर विचार-मंथन होना चाहिए।
विद्यार्थियों के आंदोलनों में बड़ी संख्या में Gen Z समुदाय आगे आता हुआ दिखाई दिया और वे भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर और ‘जय भीम’ के नारे लगा रहे थे। ‘भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर’ और ‘जय भीम’ संघर्ष और न्याय के नारों के रूप में स्थापित होते दिखाई दे रहे थे। साथ ही वे स्थापित व्यवस्था को चुनौती भी दे रहे थे। सत्ताधारियों और वर्चस्ववादी शक्तियों को नकारते हुए वे अपने शिक्षा संबंधी सवाल उठा रहे थे।
इस पृष्ठभूमि में रिपब्लिकन पार्टी के रूप में भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर को अभिप्रेत विचार और पार्टी संगठन को आगे बढ़ाते हुए 3 अक्टूबर को 69 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस पृष्ठभूमि में फुले-शाहू-आंबेडकरी विचार के प्रगतिशील पक्ष के रूप में और शोषित तथा वंचित वर्गों का प्रतिनिधित्व करने वाले रिपब्लिकनों को अंतर्मुख होकर विचार करना चाहिए।
भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने अपने जीवनकाल में और उस समय सत्तारूढ़ दल रहे कांग्रेस पार्टी का कड़ा विरोध किया था। उसी पार्टी के प्रतिनिधि और वर्तमान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी हाथ में भारतीय संविधान और बाबासाहेब आंबेडकर का विचार लेकर लोगों के सामने आ रहे हैं। उसी तरह जाति-पाति और धर्म की ऊँच-नीच वाली सनातनी विचारधारा का कड़ा विरोध करने वाले प्रगतिशील विचारों के फुले-शाहू-आंबेडकरी अनुयायियों ने जिनका आज तक विरोध किया है, वे भी भारतीय संविधान और बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों के पाईक बनते हुए अपनी भूमिका रखते दिखाई दे रहे हैं।
इस संदर्भ में ईमानदारी से भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों को स्वीकार करने वाले समुदाय पर रिपब्लिकन के रूप में एक बड़ी जिम्मेदारी आई है। क्योंकि पूरी दुनिया बाबासाहेब के विचारों की ओर मुड़ रही है और भारत में भी यह विचार बड़े पैमाने पर स्वीकार किया जा रहा है। लेकिन वर्षों से इस विचार के पाईक रहे रिपब्लिकन पार्टी संगठन की ओर यह समुदाय नहीं मुड़ रहा है। उसी तरह Gen Z समुदाय को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए आखिर कौन-सा कार्यक्रम हाथ में लिया जाना चाहिए, इसकी भी स्पष्टता दिखाई नहीं देती।
आज युवा शक्ति का जो माहौल तैयार हुआ है, उसे अपनी ओर खींचने के लिए निश्चित रूप से सभी राजनीतिक दल प्रयास कर रहे हैं। कॉकroach जनता पार्टी ने यह पहल की है, महाराष्ट्र में ठाकरे बंधु पहल कर रहे हैं, रोहित पवार और सुजात आंबेडकर भी आगे आकर युवा समुदाय को अपनी ओर लाने का प्रयास करते दिखाई दे रहे हैं।
रिपब्लिकन पार्टी के रूप में स्थापना दिवस की पृष्ठभूमि में विचार करते समय यह बात समझनी होगी कि आंबेडकरी विचार और ‘जय भीम’ के नारे बुलंद करने वाला यह समुदाय रिपब्लिकन विचार के साथ आ सकता है। इस संदर्भ में गंभीरता से विचार करके रणनीति तय करना आवश्यक है। इस संबंध में कुछ मान्यवरों के साथ विचार-विनिमय करते हुए जो प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं, उन पर भी विचार होना आवश्यक है।
आज का Gen Z समाज किसी भी पार्टी के झंडे से अधिक काम, अवसर, ईमानदारी और भविष्य को देखता है। घोषणाओं से अधिक उसके लिए कार्रवाई महत्वपूर्ण है। इसलिए युवाओं की अपेक्षाओं के अनुरूप काम रिपब्लिकन पार्टी को करना चाहिए।
शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने “शिका, संघटित व्हा, संघर्ष करा” का मंत्र दिया। आज के समय में इसका पहला हिस्सा सबसे अधिक प्रभावी है। प्रत्येक जिले में करियर गाइडेंस, UPSC/MPSC मार्गदर्शन, स्कॉलरशिप हेल्पडेस्क, विदेश में शिक्षा, कौशल विकास और डिजिटल शिक्षा केंद्र शुरू किए जाएँ तो युवा स्वयं जुड़ेंगे।
आंदोलन के साथ समाधान भी देने होंगे। युवा केवल घोषणा करने वाले नेतृत्व के साथ लंबे समय तक नहीं रहते। उनके शिक्षा, नौकरी, स्टार्टअप, इंटर्नशिप, कौशल विकास और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े सवालों पर ठोस मदद करने वाला मंच खड़ा होना चाहिए।
सोशल मीडिया पर आधुनिक तरीके से काम करना चाहिए। आज का Gen Z Instagram, YouTube और WhatsApp पर है। लंबे भाषणों की तुलना में छोटे, प्रभावी और तथ्याधारित वीडियो, पॉडकास्ट, विद्यार्थियों की सफलता की कहानियाँ और संविधान आधारित जानकारी अधिक प्रभावी हो सकती है।
नेतृत्व में युवाओं को प्रत्यक्ष अवसर देना चाहिए। केवल युवा आघाड़ी स्थापित करने से कोई फायदा नहीं होगा। निर्णय प्रक्रिया, कार्यक्रमों की योजना और पार्टी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में 18 से 35 वर्ष के युवाओं को स्थान दिया जाना चाहिए।
आंबेडकरी विचार को आधुनिक भाषा में प्रस्तुत करना चाहिए। संविधान, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, समान अवसर, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, डिजिटल अर्थव्यवस्था, कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI, उद्यमिता और वैश्विक अवसरों जैसे विषयों से बाबासाहेब के विचारों को जोड़कर बताया जाए तो युवा अधिक सहजता से जुड़ेंगे।
सेवा ही सबसे बड़ा संगठन है। विद्यार्थियों को प्रवेश दिलाना, छात्रवृत्ति दिलाना, नौकरी की जानकारी देना, अन्यायग्रस्त लोगों को कानूनी मदद देना, रक्तदान, आपदा के समय सहायता, करियर मार्गदर्शन जैसी लगातार चलने वाली सेवाओं से विश्वास पैदा होता है। विश्वास से ही संगठन खड़ा होता है।
व्यक्तिपूजा के बजाय मूल्यों पर जोर देना चाहिए। आज के युवाओं को अंधभक्ति स्वीकार नहीं है। उन्हें पारदर्शिता, जवाबदेही और ईमानदार नेतृत्व चाहिए। बाबासाहेब का विचार व्यक्ति से अधिक संविधान, समता और विवेक का विचार है, यह लगातार बताया जाना चाहिए।
विद्यार्थी और युवा संवाद अभियान शुरू किए जाने चाहिए। महाविद्यालयों में संविधान संवाद, करियर मार्गदर्शन, व्यक्तित्व विकास, आर्थिक साक्षरता, डिजिटल कौशल और सामाजिक नेतृत्व जैसे विषयों पर नियमित कार्यक्रम किए जाएँ तो युवा लंबे समय तक जुड़े रहेंगे।
आज की युवा पीढ़ी किसी भी पार्टी की ओर सिर्फ घोषणाओं के कारण नहीं जाएगी। वह उस नेतृत्व की ओर जाएगी जो उसके जीवन में वास्तविक बदलाव लाएगा।
रिपब्लिकन पार्टी यदि शिक्षा, रोजगार, संवैधानिक मूल्य, सामाजिक न्याय और आधुनिक तकनीक को केंद्र में रखकर युवाओं के लिए लगातार काम करती है, तो आंबेडकरी विचार में विश्वास रखने वाला बड़ा युवा वर्ग निश्चित रूप से जुड़ सकता है।
Grassroots यानी जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ता आज कम दिखाई देते हैं। उन्हें बड़े पैमाने पर गाँव, बस्ती और शहरों में दिखाई देना चाहिए। प्रत्येक कार्यकर्ता और नेता इस दिशा में काम करे और नेतृत्व उचित मार्गदर्शन करे, तभी यह संभव हो सकता है।
रिपब्लिकन कार्यकर्ता केवल अपने स्वकल्याण में नहीं लगा रहना चाहिए, बल्कि उसे सबसे पहले सार्वजनिक हित और प्रगतिशील विचारों के माध्यम से जनहित के लिए काम करना चाहिए। इसके लिए नेतृत्व को थोड़ा कठोर होकर कार्यकर्ताओं में अनुशासन लाना चाहिए।
कार्यकर्ताओं को कार्यक्रम हाथ में लेना जरूरी है और नेताओं को उस कार्यक्रम को क्रियाशील बनाकर सफल करना चाहिए। जैसे मराठी का मुद्दा है, हिंदुत्व का मुद्दा है, विकास का मुद्दा है, वैसे ही संविधान और स्वाभिमान का मुद्दा है। विशेष रूप से यही मुद्दा आज सबसे अधिक अपीलिंग मोड में है।
युवाओं के आंदोलनों में सक्रिय किसी अच्छे युवा या युवती को नेतृत्व देकर Gen Z विंग स्थापित किया जाए। उन्हें सोशल मीडिया चलाने के लिए आवश्यक साधन-सामग्री दी जाए, ताकि वे इस पीढ़ी के मुद्दों को सामने ला सकें और नेतृत्व अपने स्तर से उन पर उचित कार्रवाई करे।
जाति और धर्मांध शक्तियों के आहारी न होते हुए अन्न, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आवास जैसे मूलभूत सवालों पर ध्यान दिया जाए और इन्हें आंबेडकरी आंदोलन का एजेंडा बनाया जाए।
उपरोक्त संदर्भ में रिपब्लिकन पार्टी के 69वें स्थापना दिवस के अवसर पर रिपब्लिकन एकजुटता और मजबूत लोकतंत्र का संकल्प करने के लिए भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने लोकतंत्र के संवर्धन और संवैधानिक मूल्यों की जोपासना के लिए 69 वर्ष पहले जो खुला पत्र दिया था, उसके आशय और भावना के अनुरूप एक ऐसे रिपब्लिकन पार्टी संगठन को खड़ा करने का संकल्प किया जाना चाहिए, जो सेना की तरह अनुशासित और मतदाताओं का संगठित समूह हो।
भारतरत्न बाबासाहेब आंबेडकर के उस स्वप्न को पूरा करने के लिए, जिसमें इस देश में प्रजा की सत्ता वाली प्रजातांत्रिक शासन-व्यवस्था का निर्माण हो, रिपब्लिकन जनता स्थापना दिवस के अवसर पर प्रतिबद्ध होने का संकल्प करे, ऐसी अपेक्षा है।
इसी संदर्भ में अंतर्मुख होकर मार्शल रमेश रत्नाकर, राज्य कोषाध्यक्ष, समता सैनिक दल द्वारा लिखी गई इन पंक्तियों को स्मरण करें—
“विषमता का विष पिए हुए वे संविधान को ही मोड़ने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन वे अपने ही बाप-दादाओं की चेतावनी भूल गए थे,
‘जिंदा आंबेडकर से भी ज्यादा खतरनाक है मृत आंबेडकर’!
आंबेडकर जाति में नहीं रहे, वे शुद्ध स्वरूप में संविधान के अनुच्छेदों से, ग्रंथों के पन्ने-पन्ने से, युवाओं के मस्तिष्क से और धम्म के विचार से प्रवाहित हो रहे हैं।
‘स्वयं प्रकाशित व्हा!’ का संदेश लेकर…
इसलिए, तू आज स्वतंत्रता, समता, बंधुता और न्याय दिलाने वाला दीपस्तंभ बन गया है, मानवीय मूल्यों का, युवाओं की स्फूर्ति का और उज्ज्वल भविष्य का दीपस्तंभ बन गया है…
मेरे भारत राष्ट्र का…”
*प्रवीण मोरे*
राजनीतिक विश्लेषक
*03 अक्टूबर 2026*
*रिपब्लिकन पार्टी का 69वाँ स्थापना दिवस!*
