शिवनंदन पासवान को क्यों भुला दिया गया : जननायक कर्पूरी ठाकुर को दिया था ‘मरणोपरांत न्याय’ !

प्रखर समाजवादी नेता, पूर्व मंत्री, विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष शिवनंदन पासवान की 90वीं जयंती आयोजित

पटना: बिहार के वरिष्ठ समाजवादी नेता , पूर्व मंत्री, विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष और कार्यकारी अध्यक्ष शिवनंदन पासवान की 90वीं जयंती सह व्याख्यामाला मंगलवार को विधानसभा के विस्तारित भवन में आयोजित की गयी। इस मौके पर उन पर एकाग्र एक स्मारिका का भी विमोचन किया गया।
इस मौके पर वक्ताओं ने कहा, शिवनंदन पासवान ने जननायक कर्पूरी ठाकुर को मरणोपरांत न्याय दिया। नेता प्रतिपक्ष पद से विस्थापित कर दिये गये जननायक को मरणोपरांत नेता प्रतिपक्ष पद पर पुनर्स्थापित करने वाला ऐतिहासिक निर्णय सुनाया। तब वे विधानसभा के कार्यकारी अध्यक्ष थे। अपने संक्षिप्त कार्यकाल में उन्होंने इतिहास रच दिया। लेकिन वे बिसार दिये गये। अपनों ने, दोस्तों ने, राजनीतिक संगी साथियों ने उन्हें बिसार दिया। इतिहास ने उनके साथ न्याय नहीं किया।

राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम को पूर्व केंद्रीय मंत्री संजय पासवान, विधान पार्षद अब्दुलबारी सिद्दिकी, पूर्व एमएलसी गणेश भारती,पूर्व विधायक रमाकांत पांडे, वरिष्ठ पत्रकार हेमंत कुमार, संजीव चंदन, श्वेता सागर और पंकज आनंद सहित कई लोगों ने संबोधित किया । इस अवसर पर पत्रकार वेदप्रकाश, वीरेंद्र यादव, अरविंद कुमार, मुसाफिर बैठा , कंचनमाला आदि लोगों की उपस्थिति रही।



अपने अध्यक्षीय भाषण में मंगनी लाल मंडल ने कहा कि शिवनंदन बाबू समाजवादी पार्टी के जमे हुए नेता थे उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन में जिस ईमानदारी और साहसिक व्यक्तित्व का परिचय दिया, उसका उदाहरण वीरल है। श्री मंडल ने आपातकाल के दिनों को याद किया और कहा कि इंदिरा गांधी की इमरजेंसी में पक्षी भी डरते थे लेकिन प्रशासनिक अधिकारी के रूप में शिवनंदन बाबू ने जिस साहस का परिचय दिया वह अपने आप में दुर्लभ है। उन्होंने कहा कि आज के विपरीत माहौल में शिवनंदन बाबू जैसे नेताओं को याद करना अपनी पुरानी समाजवादी परंपरा से को जुड़ना है।


पूर्व केंद्रीय मंत्री संजय पासवान ने कहा कि आज के बदले हुए समय में शिवनंदन पासवान जैसे नेताओं को याद करना अपनी पुरानी राजनीतिक परंपरा को पुनर्जीवित करने के समान है। उन्होंने कहा कि उनके परिवार ने उनकी स्मृति में जो कार्यक्रम किया है ,वह स्वागत योग्य है।


पूर्व मंत्री एवं एमएलसी अब्दुल बारी सिद्दीकी ने कहा कि शिवनंदन बाबू बिहार की समाजवादी परंपरा के जीवंत मिसाल थे आज के समय में उनको याद करना अपनी पुरानी विरासत को जीवित करने के समान है।
पूर्व एमएलसी गणेश भारती ने कहा कि शिवनंदन बाबू हासिए के समाज से आने वाले अपने दौर के चमकते सितारे थे उन्होंने समाजवादी राजनीति में जिस साहस और सादगी का परिचय दिया वह आज के समय में दुर्लभ है।
पूर्व विधायक रमाकांत पांडे ने कहा कि शिवनंदन बाबू सादा जीवन उच्च विचार के प्रतीक थे उन्होंने अपने समय में जिस सादगी और ईमानदारी का परिचय दिया आज की राजनीति में वह एक नजीर की तरह याद किए जाने योग्य है।
स्त्री कल के संपादक संजीव चंदन ने कहा कि समाजवादी परंपरा में शिवनंदन बाबू जैसे लोगों को याद करना अपने समय के ज्वलंत शख्सियतों को याद करने के समान है। उन्होंने कहा कि आज बिहार में जिस तरह का अपर कास्ट नैरैटिव काम कर रहा है मीडिया और अकादमी की जगत में उसको तोड़ने की जरूरत है। और आज की बहुजन राजनीति को यह कार्यभार अपने ऊपर लेना चाहिए।


वरिष्ठ पत्रकार हेमंत ने कहा कि शिवनंदन पासवान अपने समय के वीरल नेता थे। उन्होंने जननायक कर्पूरी ठाकुर को ‘मरणोपरांत न्याय’ दिया। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष के पद से हटा दिये गये जननायक को नेता प्रतिपक्ष के पद पर पुनर्स्थापित किया। लेकिन इतिहास ने उनके साथ न्याय नहीं किया। अपनों और राजनीतिक संगी साथियों ने उन्हें बिसार दिया। उन्होंने राजस्व एवं भूमिसुधार राज्यमंत्री, बिहार विधानसभा के अध्यक्ष कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में उन्होंने अपनी कार्य पद्धति की जो मिसाल पेश की वह दुर्लभ है।

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