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नीतिशा खलखो की कविताएं

अकादमिक हत्या की गूंज ---------/---------------/-------------  सहसा ; कौंधता है मेरा वह वजूद जो मैंने पाया छोटे शहर से बाहर जब निकली थी तो लगता था सहज होगा हर कुछ पर...

साहित्य

कला-संस्कृति

‘रजत रानी मीनू’ की कविताओं में स्त्री – रुपक कुमार  

शोध सारांश: क्यों समाज में और देश स्त्री को अभी भी वह जगह नहीं मिली है जिसके वो हकदार हैं? स्त्री और पुरुष...

स्वास्थ्य

‘रजत रानी मीनू’ की कविताओं में स्त्री – रुपक कुमार  

शोध सारांश: क्यों समाज में और देश स्त्री को अभी भी वह जगह नहीं मिली है जिसके वो हकदार हैं? स्त्री और पुरुष...
ISSN 2394-093X
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समसामयिकी

‘रजत रानी मीनू’ की कविताओं में स्त्री – रुपक कुमार  

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‘गूज बम्प्स’

कहानी- चंद्रसेन ‘डूड’…  “इस यूनिवर्सिटी का यही झंझट है,” नैना ने बालों के जूड़े में पेन खोंसते हुए बोली, “इतनी साहित्यिक हिंदी मुझसे नहीं होती… वो भी ये...

बेटी दिवस पर विशेष : संजना तिवारी की कविताएं

बेटियों के लिए  सुबह  किरणों के रथ पर  आती हैं बेटियां  इन्हीं से खुशबू उधार लेकर  फूल बिखेरते हैं खुशबू  बेटियाँ ही कोयल को सिखलाती हैं तान जहाँ जन्म लेती हैं ये बसंत...

“मैं अभागा सुअर हूं”

कहानी: चंद्रसेन हॉय, डॉ. मोहन!” “हेलो, बेंसन।” मोहन अभी अपनी क्लॉस लेकर बाहर निकले ही थे कि उनका सबसे प्रिय, किंतु नटखट चीनी छात्र बेंसन सामने आ...

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