‘रजत रानी मीनू’ की कविताओं में स्त्री – रुपक कुमार
नीतिशा खलखो की कविताएं
‘गूज बम्प्स’
बेटी दिवस पर विशेष : संजना तिवारी की कविताएं
दिशोम गुरु को नेमरा में यूं मिली अंतिम विदाई! नेमरा से लौटकर
अलविदा “रोज दीदी” (डॉ. रोज केरकेट्टा )
पीढ़ा घिसता है तो पीढ़ी बनती है
पत्रकारिता जगत में जातीय भेदभाव से जूझ रहे दलित-पिछड़े पत्रकारों की कहानी
“मैं अभागा सुअर हूं”