बनारस से लेकर वर्चुअल स्पेस तक वे हर आवाज को दबाने में लगे हैं


सुशील मानव 

क्या सत्ता का हर अंग-उपांग जनता की आवाज को दबाने में लगे हैं. बनारस में किसानों के मुद्दे पर 'गाँव के लोग' के एक कार्यक्रम पर भगवा गुंडों ने हमला किया तो 7 लाख के करीब सबस्क्राइबर वाले पल पल न्यूज को यू ट्यूब के अधिकारियों ने बंद कर दिया. पल-पल न्यूज वैकल्पिक मीडिया के रूप में प्रमुखता से सक्रिय यू ट्यूब चैनल है. इसकी संस्थापक खुशबू अख्तर ने अपनी मेहनत और प्रतिबद्धता के साथ इसे सींचा है.



मुख्यधारा की मीडिया का लगातार जनता और समाज के मुद्दे से कटने, तमाम जनविरोधी नीतियों के बावजूद सत्ता से सवाल करने के बजाय सत्ता के गुणगान में  लगे रहने और भ्रामक व चेतना विरोधी अतार्किक व वैज्ञानिक खबरों के रात दिन चलाते रहने से उनकी विश्वसनीयता खत्म हो चुकी है, ऐसे में सही खबरों और सूचनाओं की तलाश में लोग वैकल्पिक मीडिया की ओर बहुत तेजी से रुख़ कर चुके हैं. वैकल्पिक मीडिया बहुत तेजी से लोगों के बीच अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने में कामयाब हुई. मीडिया के प्रति जनता के इसी बदले तेवर का ही ये नतीजा है कि महज़ डेढ़ साल में यूट्यूब के चैनल पल-पल न्यूज को  7 लाख के करीब सब्सक्राइबर मिल जाते हैं. लेकिन जनता के बीच विश्वसनीयता ही सत्ता-पक्ष के लोगों के लिए खतरा होती है. अपने चैनल पर तमाम किस्म के बाहियात वीडियो और नफरत फैलाने वाले वीडियो को बनाये रखने वाले यू ट्यूब के अधिकारियों ने पल-पल न्यूज को इसलिए टर्मिनेट कर दिया कि उसने अपने एक वीडियो के जरिये एक हेट स्पीच पर सवाल खड़ा किया था. .

चूंकि इसके पीछे कोई न कोई बहाना तो चाहिए ही था. तो कुछ ही रोज पहले एएनआइ न्‍यूज़ एजेंसी ने पल पल न्यूज चैनल के कुछ फुटेज पर अपना दावा ठोंका था। और फिर बेहद गर लोकतांत्रिक तरीके से बिना कोई नोटिस या मेमो थमाए यूट्यूब ने ‘कम्‍युनिटी गाइडलाइंस’’का उल्‍लंघन करने के बहाने सीधे पल पल न्‍यूज़ को टर्मिनेट कर दिया। जवाब देने के बाद हालांकि तब चैनल पुनः बहाल कर दिया गया था, लेकिन इस बार फिर इसे बंद कर दिया गया है. . पल पल न्यूज पर ये कोई पहला हमला नहीं है बता दें कि पल पल न्यूज के पहले चैनल को भी सितंबर 2017 में यूट्यूब ने टर्मिनेट कर दिया था. उस वक्त चैनल के पास करीब एक लाख सब्सक्राइबर थे. अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों पर सरकार संरक्षित हिंदुत्ववादी संगठनों व पुलिसिया दमन के खिलाफ़ आवाज़ उठाने के चलते ही पल- पल न्यूज चैनल के दो चैनलों को साल भर के भीतर ही टर्मिनेट कर दिया गया. चैनल की संचालक खुशबू अख्तर ने बताया कि 'एक हेट स्पीच' को सवाल करते हुए हमने खबर बनायी थी. उस खबर को ही हेट स्पीच बताकर चैनल को टर्मिनेट कर दिया गया है. हमने यू ट्यूब को इसके लिए मेल किया है.' खबर लिखने तक चैनल को पुनः बहाल नहीं किया गया था.

पल पल न्यूज के आवाज़ को नहीं बल्कि लाखों दलित वंचित अल्पसंख्यक लोगों की आवाज़ को खत्म कर दिया गया है.  सरकार अल्पसंख्यकों के हक़ में आवाज़ देनेवाली किसी भी संस्था संगठन या व्यक्ति को बर्दाश्त नहीं कर पा रही है.  आज ज़रूरत है  कि पूरी वैकल्पिक मीडिया और जनवरोधी ताकतो के खिलाफ़ आवाज़ उठाने वाले लोग पल पल न्यूज को अविलंब बहाली को लेकर एकजुट हों और सड़क पर उतरें. यूट्यूब को भी व्यवहारिक और संवैधानिक रास्ता चुनते हुए उस वीडियो का हटा देना चाहिये  जिसपर उसे या एनआईए को आपत्ति है और पल पल न्यूज को फिर से बहाल कर देना चाहिए. अगर यूट्यूब ऐसा नहीं करता है तो हमें सामूहिक रूप से यूट्यूब का बहिष्कार करते हुए यूट्यूब एप को अपने मोबाइल फोन, लैपटॉप और डेस्कटॉप से अनइंस्टॉल कर देना चाहिए.


जो लोग इसमें सरकार की भूमिका से मुंह मोड़कर सिर्फ इसे यूट्यूब और ऑनलाइन कंटेंट गाइडलाइंस पॉलिसी का मामला कह रहे हैं उन्हें यहां सरकार के उस आताताई रुख को भी समझना होगा जिसने यूट्यूब से तमाम वैकल्पिक मीडिया को टर्मिनेट करवाने के लिए सबसे पहले गूगल और यूट्यूब की किस तरह से घेरेबंदी की. मोदी सरकार ने आरोप लगाया गया कि गूगल इंडिया के लोग यूट्यूब समेत कई माध्यमों के जरिए घृणा फैलाने को रोकने में सक्षम नहीं हो पा रहे हैं. जिसके बाद पूरा  मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा. कोर्ट ने गूगल को आदेश दिया कि वह उन चुनिंदा कंटेंट को हटाए जो जिनमें घृणा और नफरत हैं. इसके बाद ही एक साजिश के तहत बीजेपी आईटी सेल द्वारा वैकल्पिक मीडिया के खिलाफ़ रिपोर्ट करने की मुहिम चली. जिसके तहत मोदी सरकार की पोल खोलने वाले तमाम यूट्यूब चैनलों को चुन चुनकर निशाना बनाया जाने लगा. इसी साजिश के तहत अब तक एक लाख चौरासी हजार सब्सक्राइबर वाले 'माइनॉरिटी मीडिया सेंटर' यूट्यूब चैनल जैसे दर्जनों चैनलों को टर्मिनेट किया या करवाया जा चुका है. एक एक कर सबकी बारी आये इससे पहले ही हमें इस वैकल्पिक मीडिया विरोधी सरकार के खिलाफ और यूट्यूब के खिलाफ़ मोर्चा खोलना होगा.

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