मुजफ्फरपुर यौन-शोषण मामले में जांच की धीमी गति: सुप्रीम कोर्ट करेगा निगरानी, हटाया मीडिया रिपोर्ट पर ब्लैंकेट बैन, मीडिया संस्थानों को गाइडलाइन बनाने के लिए भेजी नोटिस


सुशील मानव 

बिहार के मुजफ्फरपुर के शेल्टर होम में बच्चियों से बलात्कार के मामले में जांच की गति और दिशा असंतोषजनक है. सुप्रीम कोर्ट को भी जांच में हस्तक्षेप करते हुए हाई कोर्ट की निगरानी को रोकते हुए अपनी निगरानी में लाना पड़ा. जांच की गति और दिशा से सत्ता और बलात्कारियों के नेक्सस का पता चलता है. इस बीच पटना हाई कोर्ट द्वारा इसकी मीडिया रिपोर्टिंग पर पूर्ण प्रतिबन्ध (ब्लैंकेट बैन), जिसे कम-से-कम सरकार ने इसी रूप में लिया था, को हटाते हुए मीडिया के असंयमित व्यवहार पर भी नाराजगी व्यक्त करते हुए सुप्रीम कोर्ट उसके नियामक संस्थानों को गाइडलाइन बनाने को कहा है. मीडिया से संबंधित याचिका स्त्रीकाल की संपादकीय सदस्य निवेदिता ने दायर की थी.  उधर एडवोकेट अलका वर्मा के अनुसार उनकी लगातार की मांग के बावजूद ब्रजेश ठाकुर को अभी तक रिमांड में नहीं लिया गया है। लापता लड़की का पता नहीं लगाया गया है।  सुशील की रिपोर्ट:



20 सितम्बर को सुप्रीम कोर्ट में मुजफ्फरपुर शेल्टर-होम यौन-उत्पीड़न मामले में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई. मीडिया रिपोर्टिंग के मामले में इस सुनवाई का विशेष महत्व है.  इस घटना को लेकर जमीन पर सक्रियता और लेखन के जरिये विरोध करने वाली वरिष्ठ पत्रकार, साउथ एशियन वीमेन इन मीडिया की बिहार-अध्यक्ष एवं स्त्रीकाल की संपादकों में से एक निवेदिता की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मुज़फ्फरपुर बालिकागृह यौन-उत्पीड़न केस में मीडिया रिपोर्टिंग पर पटना हाइकोर्ट द्वारा लगाई गई पूर्ण रोक हटा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि मीडिया रिपोर्टिंग पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता है, लेकिन कोई रेखा तो होनी चाहिए। कोर्ट ने बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि मीडिया को निर्णयात्मक रिपोर्ट से बचना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि यौन उत्पीड़न की पीड़िता की किसी भी तरह से पहचान उजागर न हो। पीड़ित का कोई इंटरव्यू नहीं होगा। ऐसे मामलों को सनसनीखेज बनाने से बचना चाहिए.
बच्चियों के साथ यौन अपराधों के मामले में मीडिया रिपोर्टिंग पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और एनबीए को नोटिस जारी कर ऐसे अपराधों में मीडिया रिपोर्टिंग के लिए गाइडलाइन बनाने में सहयोग मांगा। कोर्ट ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया आत्मचिंतन करें कि क्या हो रहा है? चार अक्टूबर तक इन नियामक संस्थानों को कोर्ट में अपना जवाब दाखिल करने को कहा गया है.

इसके साथ ही इस केस में चल रही  सीबीआई जांच को सुप्रीम कोर्ट ने अपनी निगरानी में ले लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी ब्रजेश ठाकुर पर सख्ती दिखाते हुए कहा कि इनकम टैक्स उसकी संपत्ति की जांच करे। कोर्ट ने कहा कि ब्रजेश ठाकुर और चंद्रशेखर वर्मा का इतना आतंक है कि रिपोर्ट के मुताबिक कोई उनके खिलाफ बोलने को तैयार नहीं है. चंद्रशेखर वर्मा और पूर्व मंत्री मंजू वर्मा के पास अवैध हथियार के मामले को बिहार पुलिस गंभीरता से देखे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 20 मार्च 2018 को जिन लड़कियों को समाज कल्याण विभाग से शेल्टर होम में भेजा गया, इस पर बिहार सरकार हलफ़नामा दायर करे कि क्या उन्हें वहां घट रही घटनाओं के मद्देनजर तो नहीं भेजा गया, यानी राज्य सरकार को इसकी जानकारी तो नहीं थी?

हीं सुप्रीम कोर्ट ने मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौन उत्पीड़न कांड की जांच के लिये नयी एसआईटी( विशेष जांच दल) गठित करने के सीबीआई के विशेष निदेशक को दिए गए पटना हाईकोर्ट के आदेश पर मंगलवार 18 सितंबर को ही रोक लगा दी थी। न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगाते हुये कहा था कि सीबीआई के जांच दल को इस समय बदलना जांच के लिये नुकसानदेह होगा।

जांच प्रगति पर क़ानून के जानकारों की अस्तुष्टि 
जाँच में हुई अब तक कि प्रगति पर हमने दो जानकार और जिम्मेदार वकीलों से बात करके उनकी राय जानी कि मुजफ्फरपुर केस की जाँच किस दिशा में जा रही है तथा और क्या होता तो ये जांच बेहतर होता?
मुजफ्फरपुर केस की सीबीआई जाँच कराने के लिए पटना हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करनेवाली अल्का वर्मा ने केस में लेटेस्ट अपडेट की जानकारी देते हुए बताया कि पहले की तारीख में पटना हाईकोर्ट ने सीबीआई को नई एसआईटी गठित करने और उच्च न्यायालय में रिपोर्ट जमा कराने के लिए कहा था। सीबीआई ने उच्च न्यायालय के इस अनावश्यक हस्तक्षेप के बारे में सुप्रीम कोर्ट में शिकायत की थी, इसीलिए सुपीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर स्टे लगा दिया। आज जब मामला उठाया गया तो आदेश पर रोक लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मामले की सुनवाई सुप्रीमकोर्ट की निगरानी में कराने का निर्णयलिया।
अलका जांच की दिशा और गति से संतुष्टि के सवाल पर कहती हैं कि ‘जिस दिशा में जांच चल रही है उससे मैं संतुष्ट नहीं हूं। मेरी लगातार की मांग के बावजूद ब्रजेश ठाकुर को अभी तक रिमांड में नहीं लिया गया है। लापता लड़की का पता नहीं लगाया गया है। हम त्वरित कार्रवाई चाहते थे.’ क्या हाईकोर्ट की निगरानी ठीक दिशा में है के जवाब में अल्का वर्मा ने कहा कि, अगर सुप्रीम कोर्ट द्वारा जांच निगरानी की जाती है तो मुझे खुशी होगीl



स्त्रीवादी न्यायविद एवं सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता अरविन्द जैन ने कहा कि जो मौजूदा ढांचा है, उसी में पॉक्सो अपराधों की जांच होना नियति है। इसमें सब वही लोग हैं। सीबीआई, एसआईटी में भी वही लोग हैं, जिनकी स्पेशल ट्रेनिंग नहीं है। हाँ, सीबीआई और एसआईटी की जाँच में थोड़ा फर्क हो सकता है। सबकुछ इस बात पर डिपेंड करता है कि मॉनिटरिंग कौन कर रहा है। ज़रूर कहीं न कहीं मॉनीटरिंग में गड़बड़ी रही होगी तभी सुप्रीम कोर्ट ने अपने हाथों में मॉनीटरिंग ले ली है- लोकल ऑथोरिटी का प्रोशर तो होता ही है।

इस सवाल के जवाब में कि, क्या शिनाख्त परेड ऐसे में ज़रूरी हो जाता है अरविंज जैन  कहते हैं कि जब सब कुछ ओपेन हो तो शिनाख्त परेड से बहुत फर्क नहीं पड़ता। जो साक्ष्य मिलते हैं और बच्चों के जो बयान होते हैं जाँच और सुनवाई उसी के बेसिस पे होती है। शिनाख्त परेड कराई भी जा सकती है पर इसकी बहुत ज़रूरत नहीं है। अरविन्द जैन कहते हैं कि घटना होने पर जांच के बाद सिस्टम को हम वैसा का वैसा छोड़ देते हैं। उसमें कोई ज़रूरी सुधार तक नहीं किया जाता। इस तरह के पहले भी केस हैं जिनसे कोई सबक नहीं लिया गया। आज हालात ये है कि हजारों बच्चे गायब हो रहे हैं, ह्युमन ट्रैफिकिंग के मामले बढ़े हैं। इनपर नजर रखने के लिए सरकार की ओर से कमीशन होते हैं, चाइल्ड प्रोटेक्शन बोर्ड होते हैं, जुवेनाइल बोर्ड होते हैं। पिछले 15-20 साल में सबकुछ एनजीओ के हाथों में सबकुछ सौंप देने का नतीजा है ये। जबकि एनजीओ का चरित्र ही पैसा इकट्ठा करना होता है। उन्हें राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय कई जगहों से फंडिंग होती है। आवारा पूँजी इकट्ठा हो जाने के बाद ये पुलिस और अपराधियों को मिलाकर एक नेक्सस बना लेते हैं।

क्या है मुजफ्फरपुर में बच्चियों से बलात्कार का यह मामला और कैसे इस मुद्दे पर पूरा देश न्याय का इन्तजार कर रहा है, जानने के लिए नीचे ख़बरों का लिंक देखें. 

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सुशील मानव फ्रीलांस जर्नलिस्ट हैं. संपर्क: 6393491351

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