इस काण्ड में महिला है, साहित्य है, साहित्य का सम्मान है, उत्पीड़न है, स्कैंडल है, पावर है, पावर का दुरूपयोग है और हाँ राजनीति भी



सुशील मानव 

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति रतनलाल हंगलू के व्हाट्सऐप चैट और बातचीत का ऑडियो वायरल होने के बाद इलाहाबाद में हंगामा बरपा है. मामला हिन्दी साहित्य और एक विश्वविद्यालय से जुड़ा हाई प्रोफाइल है, लेकिन साहित्य जगत न इसे लेकर संवेदित है और न ही मुखर. विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग सहित अन्य विभागों में हलचल जरूर है, लेकिन वह कुलपति के पक्ष में माहौल बनाने के लिए-न्याय के लिए नहीं. मारपीट हो रही है, छात्राओं में दहशत है, महिला साहित्यकार के घर पर भी हमला हुआ है लेकिन साहित्य जगत असम्पृक्त है. सब की अपनी ढपली है अपना राग-हर कोई दूसरे को राजनीति करने का आरोपी बता रहा है, इस बीच असंवेदनशील मीडिया की हरकतें हैं और प्रभावित महिला साहित्यकार की परस्पर विरोधाभाषी बातें. प्रशासन कुलपति के खिलाफ जांच की जगह मामले को किसी तरह भटकाने में लगा है और विद्यार्थियों का दावा है कि कुलपति की डेढ़ दर्जन महिलाओं से बातचीत का ऑडियो उनके पास है. इस दावे के साथ नुकसान वहां के माहौल को है-जो स्वतः महिला विरोधी दिखने लगता है. लेकिन सबसे अधिक आश्चर्यजनक है कुलपति के नियोक्ता मानव संसाधन विकास मंत्रालय और राष्ट्रपति कार्यालय की चुप्पी. सुशील मानव की रिपोर्ट:

मीरा स्मृति सम्मान/पुरस्कार में कुलपति रतनलाल हंगलू इस सम्मान की भी जिक्र है बातचीत में 




यथार्थ और दार्शनिक बयानों में उलझा हमला

महिला साहित्यकार का कहना है कि 18 की रात के तीन बजे महिला साहित्यकार के घर दो हमलावर गए और उनका नाम लेकर उनकी अम्मा से पूछा कि वह कहाँ है हम उसे छोडेंगे नहीं। उनके घर के सामने महिला साहित्यकार के विरुद्ध नारेबाजी की और उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी। बता दें कि महिला साहित्यकार उस समय किसी कार्यक्रम के सिलसिले में बाहर गई हुई थी। हमारी उनसे फोन पर बात हुई जिसमें उन्होंने बताया कि ‘हाँ हमारे घर कुछ लोग आये थे और मेरी अम्मा को मुझे जान से मारने की धमकी देकर गए हैं।  हमलावर कौन थे या उनको आपके घर किसने भेजा था, आपको किसी पर शक़ है, आदि सवालों के जवाब में वो कहती हैं कि ‘ये वही लोग हैं जो शांति और व्यवस्था को भंग करना चाहते हैं। जो मनुष्य के खून के प्यासे हैं।‘ यह दार्शनिक जवाब अखबारों में छपे उनके बयान से मेल नहीं खाता, जिसमें वे कुलपति हंगलू के लोगों को हमलावर बताती हुई प्रकाशित हुई हैं.

 इस हमले के बाद अखबारों ने उनका और उनके दिवंगत पति का नाम तक लिखना शुरू कर दिया है, तस्वीरें छापी हैं, जो महिलाओं के हित में गैरकानूनी हरकत है. अमर उजाला  द्वारा उनका नाम और फोटो छापने की बात पर वे नाराजगी और गुस्सा दर्ज कराते हुए पत्रकार समुदाय से अपील करती हैं कि अमर उजाला के इस गैर कानूनी और गैरजिम्मेदाराना रिपोर्टिंग के लिए घोर निंदा और बहिष्कार और भर्त्सना कीजिए। महिला साहित्यकार ने कहा कि गर अमर उजाला कल लिखित माफी नहीं माँगता तो मैं उसके खिलाफ कानूनी कारर्वाई के लिए बाध्य होऊँगी।

हीं महिला साहित्यकार ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के कुलपति रतन लाल हांगलू से अपनी दोस्ती को स्वीकार करते हुए कहा है कि ‘हमारी उनसे अच्छी दोस्ती है वो हमारे घर भी कई बार आ चुके हैं। काश्मीर पर उनकी जानकारी जबर्दस्त है। मैं आजकल काश्मीर पर एक किताब लिख रही हूँ जिसमें मैं उनकी मदद लेती रहती हूँ। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि गर कुलपति दोषी हैं तो उनके खिलाफ़ कार्रवाई हो।‘”इन दो विरोधाभाषी बयानों के साथ वे विक्टिम होने से खुद को मुक्त कर लेती हैं. लेकिन यह इतना आसान भी नहीं है, क्योंकि इसी के साथ कुलपति पद के दुरूपयोग के दोषी सिद्ध होने की कतार में खड़े हो जाते हैं.


हुआ था ऑडियो भी वायरल:

कुलपति द्वारा महिला साहित्यकार को भेजे गये व्हाट्स ऐप मेसेज के वायरल होने के बाद उन दोनों के बीच इंटेंस बातचीत का एक ऑडियो भी वायरल हुआ है. इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष और एबीवीपी के सचिव रोहित मिश्रा ने कुलपति रतन लाल हंगलू और महिला साहित्यकार के बीच अंतरंग बातों की ऑडियो-क्लिप जारी की है। 33 मिनट 20 सेकंड का ये ऑडियो-क्लिप दरअसल मोबाइल पर हुई बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग है। ऑडियो संभवतः दोनों के बीच शुरुआती बातचीत की कॉल-रिकार्डिंग है। क्योंकि महिला साहित्यकार द्वारा सबसे पहले यही प्रश्न पूछा गया है कि ‘आपको मेरा नंबर कहाँ से मिला।क्योंकि मैंने तो आपको कभी कॉल नहीं किया। इवेन जब आपका मेसेज आया और आपने कार्यक्रम की ढेर सारी रिपोर्ट वगैरह भेजी तो उसमें आपकी पिक्चर लगी हुई थी। तो भी मैंने पूछा था कि इज दिस हांगलूज नंबर। तो मुझे लगा कि जो किताब मैंने आपको दिया था आपने उसमें से मेरा नंबर लिया होगा।‘ वहीं हंगलू साहेब शिकायत करते हुए कहते हैं कि ‘उसके बाद से तो तुमने मुझसे कांटैक्ट ही नहीं किया। महिला बताती है कि आपका नंबर और कार्ड सब वहीं होटल में ही छूट गया था।‘

जैसा कि ऑडियो में दोनो की बातचीत से स्पष्ट है कि महिला साहित्यकार से संवाद की शुरुआत कुलपति की ओर से ही हुई थी, वॉट्सएप पर भी और वायसकॉल में भी।ऑडियों में कुलपति रतन लाल हांगलू दिल्ली स्थित महिला साहित्यकार से बातचीत में अपने प्रभाव का उपयोग करके नौकरी और बेहतर करियर देने का वादा कर रहे हैं। ऑडियो में, कुलपति के दिल्ली आने और उस महिला से मिलने की योजना के बाबत बात हो रही है जिसमें महिला अपनी अम्मा को बहाने से दो दिन के लिए गाँव भेजने की सफल योजना के बारे में बता रही है। इसके बाद वो विभिन्न मामलों के संस्थानों में शीर्ष पदों पर आसीन अपने दोस्तों के बारे में बताते हुए उक्त महिला साहित्यकार को व्याख्यान देने और संगोष्ठियों में भाग लेने के लिए आमंत्रित करवाने की बात करते हैं।

पूरी बातचीत के दौरान महिला साहित्यकार द्वारा कई बार अपने दिवंगत साहित्यकार पति को याद किया गया है, उसे सबसे खूबसूरत मर्द बताया गया है। और उसके बाद रतन लाल हंगलू को भी वे बेहद खूबसूरत बताती है। ऑडियों में साफ सुना जा सकता है कि बातचीत के दौरान दो बार रतन लाल हांगलू द्वारा शक़ जाहिर किया जाता है कि उधर कोई है, मुझे किसी की आवाज सुनाई पड़ी है जिसे महिला साहित्यकार ने पहले तो मुझे तो कोई आवाज नहीं सुनाई दे रही और फिर नेटवर्क की समस्या के चलते दूसरी लाइन जुड़ने की बात कहती है। और बाद में अपने दिवंगत जीवन साथी के भूत की आवाज़ बताकर खिलखिलाकर हँसती हैं। महिला कहती है कि हो सकता है मेरे पति का भूत तुमसे गुस्सा हो कि तुम उसकी बीवी के साथ क्या बात कर रहे है या फिर वो तुम्हें शुक्रिया कह रहा हो अपनी बीवी का ख्याल रखने के लिए उसका अकेलापन बाँटने के लिए।

बीच-बीच में कहीं-कहीं दुनिया जहान की बाते हैं और कहीं-कहीं बेहद निजी बातें। ऑडियों में कई बार अपने लिए कुलपति शब्द का इस्तेमाल करता हुए कहता है कि इलाहाबाद यूनिवर्सिटी गुंडों और ठगों का अड्डा है। तिस पर महिलासहानुभूति जताते हुए कहती है गलत यूनिवर्सिटी पाकर आप फँस गये कुलपति साहेब। ऑडियों में कल्याणी देवी यूनिवर्सिटी और हैदराबाद यूनिवर्सिटी का भी जिक्र आता है। बातचीत में अक्टूबर 2017 के मीरा स्मृति पुरस्कार का भी जिक्र है। जहाँ ऑडियो में रतनलाल हांगलू कहते हैं कि मैं तुम्हें मीरा स्मृति पुरस्कार देते समय तुम्हें देखकर बिल्कुल अवाक था क्या कमाल की चीज है। इस पर महिला साहित्यकार खिलखिलाकर हँस पड़ती है। इसके आगे ऑडियो में दिल्ली का मौसम और ठंड के बाबत उक्त महिला साहित्यकार से वे पूछते हैं। और बताते हैं कि उन्हें कई कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए दो दिन बाद दिल्ली आना है तो कैसे कपड़े लेकर आएं। महिला साहित्यकार अपने ड्राइवर का नंबर देने और उसे स्टेशन पर लेने, भेजने या खुद लेने जाने की बात करती है। बातचीत के दौरान महिला पूछती है ‘हू आई एम ऑफ योर्स’  और कुलपति महोदय रोमांटिक अंदाज में बताते हैं कि ‘यू आर माई जान, यू आर माई सोल।’ महिला का प्रत्युत्तर है, ‘हाय राम इतना ज्यादा।‘ कुलपति अपने आपको हीरो बताते हुए कहते हैं कि मुझे कोट पैंट पहनना पड़ता है कई कार्यक्रमों में जाना होता है ऐसे वैसे कपड़े पहनकर चला जाऊं तो ऐसे वैसे लोग जो वहाँ होते हैं कि कहते हैं कि, अरे अरे देखो लौंडा आ गया कैसा वीसी बना है। महिला आगे कहती है नहीं आप हीरो हैं। फिल्मों वाले नहीं सचमुच के हीरो। और शेखी बघारते हुए फिर रतनलाल महोदय कहते हैं कि एक कार्यक्रम में मैंने कहा कि पूरा हिंदुस्तान एक तरफ और मैं एक तरफ।

ऑडियो का वार्तालाप कुछ ऐसे उदाहरणों का भी समर्थन करता है जो वीसी और उस महिला के बीच व्हाट्सएप चैट में मौजूद थे, जो पहले दुबे द्वारा सार्वजनिक किया गया था।



रोहित मिश्रा द्वारा जारी किए गए ऑडियो पर, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पीआरओ चितरंजन कुमार सिंह का कहना है कि, "रोहित मिश्रा द्वारा सार्वजनिक किया गया ऑडियो की जाँच कराये जाने की ज़रूरत है जिससे ये पता चल सके कि ये ऑडियो विश्वसनीय है या किकिसी ने वीसी की आवाज़ की मिमिक्री करके तैयार की है।पूरे मुद्देकी अच्छी तरह से जाँच होनी चाहिए क्योंकि यह वीसी की छवि को खराब करने के षड्यंत्र के अलावा कुछ भी नहीं है।

महिला साहित्यकार से फोन पर जब मैंने पूछा कि वे  ऑडियो रिलीज करनेवाले रोहित मिश्रा या वॉट्सएप चैट रिलीज करनेवाले अविनाश दूबे को जानती हैं तो उन्होंने कहा नहीं मैं किसी रोहित मिश्रा या अविनाश दूबे को नहीं जानती। मैंने उनसे अगला प्रश्न किया कि क्या ऑडियो में वो अपनी आवाज़ होने की पुष्टि करती हैं तो उन्होंने कहा कि ‘नहीं’।

वहीं ऑडियो रिलीज करने वाले रोहित मिश्रा का कहना है ये तो अभी सिर्फ पहली ऑडियो रिकॉर्डिंग हैं। मेरे पास  17 अन्य रिकॉर्डिंग भी हैं, जिसमेंकुलपति द्वारा अन्य महिलाओं के साथ इसी तरह की आपत्तिजनक बातचीत करते सुना जा सकता है, इन महिलाओं में से कई तो इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के संकाय सदस्य हैं। रोहित मिश्रा के दावे से इस बात पर भी शक़ को बल मिलता है कि वाट्सएप चैट और बातचीत के ऑडियो कुलपति रतलाल हांगलू के मोबाइल से ही लीक किए गए हैं।


शिक्षक संघ की भूमिका

आरोपी कुलपति के समर्थन में शांतिमार्च निकालने की बात पूछने पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय के शिक्षक एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रो राम सेवक दूबे ने फोन पर बताया कि न तो मैं शामिल हुआ था इस शांति मार्च में और न ही शिक्षक एसोसिएशन। वह इंडिविजुअल छात्रों और शिक्षकों का मार्च था। इस शांतिमार्च में जो शिक्षक शामिल हुए थे वे व्यक्तिगत तौर पर शामिल हुए थे। उनके शामिल होने में शिक्षक एसोसिएशन का कोई लेना देना नहीं था। लेकिन यह पूछे जाने पर कि आप लोग आरोपी कुलपति के समर्थन में तो खड़े ही हैं जबकि अभी तक कोईं आंतरिक या वाह्य जाँच कुलपति रतन लाल हांगलू के खिलाफ नहीं हुई, शिक्षक संगठन के अध्यक्ष राम सेवक दूबे प्रतिप्रश्न करते हैं कि शिक्षक या कुलपति के पद पर बैठे कोई व्यक्ति ऐसे चरित्र का हो सकता है क्या? हम साथ काम करते हैं तो हमें इतना भरोसा तो होना ही चाहिए अपने साथी शिक्षकों और कुलपति पर। आगे उन्होंने बताया कि  पूरे मामले को लेकर इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के शिक्षक एसोसिएशन की बैठक प्रस्तावित है।‘ बैठक के बाद यह स्पष्ट हो गया कि शिक्षक संघ इस पर बंटा हुआ है. सम्बद्ध कॉलेजों के शिक्षक संघ ने छात्र-नेताओं पर बैठक के दौरान हंगामे और मारपीट का आरोप लगाया है. इस बीच विश्वविद्यालय के मिनिस्टीरियल एंड टेक्निकल स्टाफ यूनियन के अध्यक्ष डॉ. संतोष सहाय वीसी के प्रकरण की सीबीआई जांच कराने की मांग की है.

कुलपति के पक्ष में शान्ति मार्च में शिक्षकों के न सिर्फ शामिल होने की खबर है, बल्कि कुछ शिक्षक उनके पक्ष में जोर-शोर से सामने आ रहे हैं. विश्वविद्यालय के जानकारों का मानना है कि शिक्षक जो उनके समर्थन में आ रहे उनमें प्रायः प्रोबेशन अवधि वाले शिक्षक हैं, जिनकी नियुक्तियां विवादास्पद भी बतायी जा रही हैं.

छात्र मुखर आवाज  

इस पूरे प्रकरण में सबसे मुखर आवाज छात्र हैं, जिनका मानना है कि ऐसे कुलपति के होने से कैम्पस में महिलायें सुरक्षित नहीं होंगी. विद्यार्थी इस मुखरता का दंड भी पा रहे हैं, उनपर मुकदमे हुए हैं.

पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह ने बताया कि कैंपस के छात्र आरोपी कुलपति के इस्तीफे और 12000 छात्राओं की सुरक्षा की माँग को लेकर कैंपस में ही धरने पर बैठे थे उस समय करीब एक बजे वह भी छात्रों के धरने को समर्थन देने कैंपस पहुँची जिसके बाद उनपर और धरना दे रहे छात्रों पर करीब 200-300 बाहरी गुंडों ने कैंपस में अंदर घुसकर हमला कर करके बमबाजी की। हमले में ऋचा सिंह वर्तमान अध्यक्ष अविनाश यादव और कई छात्रों को हल्की चोटें आई हैं। जिसके बाद कल शाम को कैंपस की छात्राओं ने महिला छात्रावास के बाहर गेट पर धरने प्रदर्शन करके अपना प्रतिरोध और रोष अभिव्यक्त किया। ऋचा सिंह का आरोप है कि राज्य प्रशासन और सरकार पूरे मामले में लगातार खामोशी ओढ़े हुए इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के बीएचयू में तब्दील होने का इंतजार कर रहा है। बता दें कि पिछले साल बीएचयू में लड़कियों की असुरक्षा और शिकायतों को लेकर ऐसे ही प्रशासनिक उदासीनता के चलते छात्राओं का आदोलन बड़ी हिंसा में तब्दील हो गया था।ऋचा सिंह बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहती हैं कि इस तरह के हमले करवाकर विश्वविद्यालय प्रशासन पूरे मामले को दो छात्र संगठनों का आपसी संघर्ष साबित करके पूरे मामले से आरोपी कुलपति रतनलाल हांगलू को बचाने की फिराक़ में है।

वहीं पीआरओ चितरंजन कुमार सिंह से कुछ सवाल पूछे गए जैसे कि 1- पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष रोहित मिश्रा का कहना है कि उसके पास 17 अलग अलग स्त्रियों से बातचीत के ऑडियो हैं इस पर क्या कहना है आपका?2- आप बार बार आरोप लगा रहे हैं कि पूरे मामले में राजनीति की जा रही है तो राजनीति करनेवाले कौन लोग हैं और वे क्यों राजनीति कर रहे हैं? 3- बिना किसी जांच के यूनिवर्सिटी का टीचर एसोसिएशन ऐसे कैसे कुलपति के पक्ष में खड़ा हो सकता है। क्या टीचर एसोसिएशन के लोग राजनीति नहीं कर रहे पूरे मामले पर पक्षपाती होकर?जिसका उन्होंने जवाब नहीं दिया।

मंत्रालय का मौन

छात्र-नेताओं ने एसपी, एडीजी (यूपी), एचआरडी मंत्रालय, भारत सरकार और विजिटर के नाते राष्ट्रपति  को भी एक पत्र लिखा है जिसमें कुलपति के इस्तीफे और उनके खिलाफ जांच की मांग की जा रही है। "मैंने उच्च अधिकारियों को लिखा है और यह स्पष्ट कर दिया है कि वीसी के पास कोई अन्य विकल्प नहीं है अपने पद से इस्तीफा देने के सिवा ताकि पूरे मुद्दे में एक स्वतंत्र जांच की जा सके.  क्योंकि कुलपति अनैतिक चरित्र का है और यह कैंपस के 12000 से अधिक लड़कियों के छात्रों की सुरक्षा का सवाल है। लेकिन बेटी बचाओ, बेटी पढाओ सरकार के मंत्री इस मसले पर चुप हैं.

मानहानि का मुकदमा

उधर  48 घंटे का अल्टीमेटम पूरा होने के बाद आज पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह द्वारा पीआरओ चितरंजन कुमार और रजिस्ट्रार एन के शुक्ला के विरुद्ध मानहानि का मुकदमा दर्ज करवाया गया। ऋचा सिंह का आरोप है कि मेरे लिखित नोटिस का जवाब लिखित में देने के बजाय पीआरओ चितरंजन द्वारा फोन करके तमाम हथकंडो द्वारा केस से पीछे हटने के लिए लगातार दबाव बनाया गया।

सुशील मानव फ्रीलांस जर्नलिस्ट हैं. संपर्क: 6393491351

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