कुलपति हंगलू भेजे गये छुट्टी पर, होगी जुडीशियल जांच, अश्लील चैट मामला


सुशील मानव 

कुलपति के पद और प्रभाव के दुरुपयोग के आरोपी इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो रतनलाल हंगलू को छुट्टी पर भेजे जाने के साथ ही उनके अश्लील-चैट मामले की जुडिशियल जांच की सिफारिश कर दी गयी है. छात्रों ने उठाये जांच समिति गठन की संवैधानिकता पर सवाल. विद्यार्थियों  में  भ्रम है कि जांच आंतरिक रूप से गठित की गयी है या मंत्रालय के निदेश पर, जिसके बारे में विश्वविद्यालय के पीआरओ ने कहा कि न तो हम इसकी पुष्टि कर सकते हैं और न खंडन. मंत्रालय में छुट्टी होने के कारण इस पर किसी अधिकारी से बात नहीं हो सकी.  छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष ऋचा सिंह के अनुसार जांच के लिए नियुक्त जस्टिस अरुण टंडन विश्वविद्यालय से सम्बद्ध के कॉलेज जे जुड़े हैं इसलिए इसमें कंफ्लिक्ट ऑफ़ इंटरेस्ट को देखते हुए हम इस जांच का विरोध करेंगे और नयी समिति गठित करने की मांग करेंगे जिसमें एक महिला सदस्य हो. ऋचा का आरोप है कि समिति के साथ नोडल ऑफिसर एक प्रोबेशन पर कार्यरत असिस्टेंट रजिस्ट्रार को बनाया गया है, यह भी संदेह पैदा करता है. इस बीच कानूनविदों की राय में जांच में सत्यता पाये जाने पर, यद्यपि बातचीत म्यूचुअल कंसेंट की लगती है, कुलपति होंगे पद के दुरूपयोग के दोषी, लगेगा प्रीवेंशन ऑफ़ करप्शन एक्ट भी.


विश्वविद्यालय के एक कार्यक्रम में कुलपति रतनलाल हंगलू और जस्टिस अरुण टंडन 


स्त्रीकाल सहित मीडिया की रिपोर्टिंग, तमाम छात्रसंगठनों का साझा विरोध, संघर्ष और पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह के प्रयासों के बाद आखिरकार इलाहाबद विश्वविद्यालय प्रशासन जाग ही गया। कुलपति के पद और प्रभाव के दुरुपयोग के आरोपी प्रो रतनलाल हंगलू को लंबी छुट्टी पर भेज दिया गया है। एमएचआरडी के निर्देश पर इस पूरे मामले की जांच के लिए हाईकोर्ट के रिटायर जज अरुण टंडन की अध्यक्षता में  एक जांच समिति गठित कर दी गई है। इलाहाबाद विश्विद्यालय के अतिथि गृह में इसकी जांच होगी। जस्टिस अरुण टंडन इलहाबाद विश्वविद्यालय से सम्बद्ध एक डिग्री कॉलेज, एस. एस.खन्ना, की संचलन समिति से जुड़े हैं.


जाँच पूरी होने तक रतनलाल हंगलू छुट्टी पर रहेंगे। इस दरमियान वे कैंपस में अपनी मर्जी से नहीं आ सकते। प्रभारी कुलपति प्रो केएस मिश्रा ने जांच कमेटी गठित की है। जबकि असिस्टेंट रजिस्ट्रार देवेश गोस्वामी को जांच कमेटी का नोडल अफसर बनाया गया है। उनके पास सारे दस्तावेजों को कलेक्ट करके न्यायमूर्ति तक ले जाने का जिम्मा होगा। 24-26 सितंबर तक इस प्रकरण से जुड़े साक्ष्य मांगे गए हैं। वहीं कार्यवाहक कुलपति ने इस मामले को लेकर छात्रों से कोई धरना प्रदर्शन न करने की अपील की है। पीआरओ चितरंजन कुमार सिंह ने बताया कि कार्यवाहक कुलपति की ओर से न्यायमूर्ति टंडन को इस बाबत पत्र भेज दिया गया है। जबकि इससे पहले तक रतन लाल हंगलू ऑडियो और वाट्सएप चैट से लगातार इनकार  करते हुए इसे गलत ठहरा रहे थे। इतना ही नहीं इस मामले को उजागर करनेवाले छात्रनेताओं के खिलाफ प्रशासन की ओर से एफआईआर तक दर्ज कराई गई थी। बता दें कि छात्रों के उग्र विरोध के चलते आरोपी वीसी रतन लाल हंगलू 17 व 18 सितंबर को कुलपति ऑफिस तक नहीं जा सके थे। 19 सितंबर को एचआरडी मंत्रालय ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन से रिपोर्ट माँगी थी।

छात्रों ने उठाये जांच पर सवाल 
छात्र-नेताओं ने हालांकि जांच समिति गठन की संवैधानिकता पर सवाल. छात्रों के सामने भ्रम है कि जांच आंतरिक रूप से गठित की गयी है या मंत्रालय के निदेश पर, जिसके बारे में विश्वविद्यालय के पीआरओ ने कहा कि न तो हम इसकी पुष्टि कर सकते हैं और न खंडन. मंत्रालय में छुट्टी होने के कारण इस पर किसी अधिकारी से बात नहीं हो सकी. छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष ऋचा सिंह के अनुसार जांच के लिए नियुक्त जस्टिस अरुण टंडन विश्वविद्यालय से सम्बद्ध के कॉलेज जे जुड़े हैं इसलिए इसमें कंफ्लिक्ट ऑफ़ इंटरेस्ट को देखते हुए हम इस जांच का विरोध करेंगे और नयी समिति गठित करने की मांग करेंगे जिसमें एक महिला सदस्य हो. ऋचा के अनुसार जस्टिस टंडन कई कार्यक्रमों में कुलपति के अतिथि रहे हैं. पूर्व छात्र-संघ अध्यक्ष का आरोप है कि नोडल ऑफिसर एक प्रोबेशन पर कार्यरत असिस्टेंट रजिस्ट्रार को बनाया गया है, यह भी संदेह पैदा करता है.

इलाहाबाद विश्वविद्यालय 


जारी है विरोध प्रदर्शन 
इससे पहले शुक्रवार 20 सितंबर को आरोपी वीसी के खिलाफ पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष दिनेश यादव, रोहित मिश्रा, ऋचा सिंह, वर्तमान अध्यक्ष अविनाश यादव की अगुवाई में छात्रों ने कैंपस में छात्रों के बीच एकजुटता प्रदर्शित करते हुए पैदल मार्च निकाला और वीसी के खिलाफ नारेबाजी करते हुए इस्तीफे की मांग की। छात्रों ने कहा कि जबतक एचआरडी मंत्रालाय आरोपी वीसी को बर्खास्त नहीं करता तब तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा। छात्रों का कहना है कि नैतिकता और भरोसा खोने के बाद आरोपी रतन लाल हंगलू को वीसी पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। वहीं छात्रों ने उन शिक्षकों पर भी निशाना साधा जोकि निजी स्वार्थ के लालच में वीसी पद और इलाहाबाद विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा व गरिमा का हनन करनेवाले रतन लाल हंगलू का बचाव कर रहे हैं।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के वर्तमान छात्रसंघ अध्यक्ष अविनाश यादव का कहना है छात्रों ने ठान लिया है के वे आरोपी वीसी को किसी भी कीमत पर अब वीसी की कुर्सी पर नहीं बैठने देंगे। जबकि पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष रोहित मिश्रा का कहना है कि इविवि में अगर किसी छात्रा के साथ छोड़खानी की कोई शिकायत आती है तो बिना जांच किए ही आरोपी छात्र को निलंबित कर दिया जाता है। हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो कृपाशंकर पांडेय को एचआरडी को पत्र लिखने के आरोप में पद से हटा दिया गया जबकि वे आखिर तक कहते रहे कि उन्होंने कोई पत्र नहीं लिखा है। प्राणी शास्त्र विभाग के प्रो संदीप मल्होत्रा को भी बगैर आरोप सिद्ध हुए ही शिकायत मात्र के आधार पर विभागाध्यक्ष के पद से हटा दिया गया था। लेकिन खुद कुलपति पर बेहद गंभीर और घिनौने आरोप के बावजूद अपनी कुर्सी पर बने हुए हैं। जबकि पूरी निर्लज्जता से इविवि के शिक्षक उनका बचाव कर रहे हैं।
वहीं इलाहाबाद विश्वविद्यालय की महिला सलाहकार बोर्ड (वैब) की सदस्य रही प्रो लालसा यादव ने कहा कि वो 2016 में वैब की सदस्य थी जबकि वैब की बैठकों के दौरान उन्हें इस तरह के किस पत्र की जानकारी नहीं मिली। प्रो लालसा यादव ने पत्र को संदिग्ध व फर्जी बताया है।

क़ानूनविदों की राय 
इस बीच कानूनविदों की राय में जांच में सत्यता पाये जाने पर, यद्यपि बातचीत म्यूचुअल कंसेंट की लगती है, कुलपति होंगे पद के दुरूपयोग के दोषी, लगेगा प्रीवेंशन ऑफ़ करप्शन एक्ट भी. स्त्रीवादी अधिवक्ता अरविंद जैन के अनुसार ऐसे मामले न्यायपालिका में भी आये हैं, जिसके कारण आरोपी जजों को पद-त्यागना पड़ा था.

सुशील मानव फ्रीलांस जर्नलिस्ट हैं. संपर्क: 6393491351

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