नीतीश कुमार को कौन दे रहा धीमा जहर (!)


संजीव चंदन

नीतीश जी

उम्मीद है मजे में होंगे, सत्ता मजे में ही रखती है! चाहे लाख बलाएँ आयें, राज्य में बेटियों से राज्य-संरक्षित बलात्कार हो रहा हो या महिलाएं नंगी की जा रही हों. हो तो बहुत कुछ रहा है, लेकिन सत्ता आपकी अंतर-आत्मा तक इसके असर को पहुँचने ही नहीं देती होगी.



लेकिन मैं, आपको लेकर चिंतित हूँ, सच में चिंतित हूँ, खासकर तब से जब से मुझे यकीन हो गया है कि आपको धीमा जहर दिया जा रहा है. पता है मैं आपका शुरू से ही आलोचक रहा हूँ, फिर भी लगाव के भी कई कारण थे. इसके बावजूद कि आप बिहार के पुष्यमित्र शुंगों से मिलकर राजकाज चलाते रहे, आप वृह्द्द्रथ सिद्ध होने वाले हैं, लेकिन वृहद्रथ के मौर्यवंशीय होने के जो फर्क होते हैं वह तो था ही न. आपको मैं हमेशा से ही गैरब्राह्मण सत्ता का एक्स्टेंशन ही देखता रहा हूँ, इसके बावजूद कि आप अपने पूर्ववर्ती गैरब्राह्मण सत्ता के प्रभावी लोगों से सत्ता हासिल करने के लिए बार-बार पुष्यमित्र शुंगों से हाथ मिलाते रहे हैं.

खैर, आलोचक होने के बाद भी जो सबसे प्रभावी लगता था आपमें मुझे वह था आपके शासन काल में महिलाओं को लेकर लिए गये निर्णय-समुच्चय. कितनी बार, कितने आलेखों में, भाषणों में इस बात का जिक्र करने में मुझे गर्व होता था कि आपने बिहार को पहला राज्य बनाया जहाँ पंचायतों में महिलाओं को 50% आरक्षण दिया गया. आपने महिलाओं को नौकरियों में आरक्षण दिया. सच में कितना फर्क पडा बिहार के समाज पर, महिलाएं समाज में विजिबल हुईं, सत्ता में उनकी शेयरिंग बढ़ी, घर-समाज में आर्थिक हैसियत बढ़ने से महिलाओं का सम्मान बढ़ा! यह सब आप जितना समझ पा रहे हों या नहीं, हम जैसे आपके आलोचक समझ रहे थे. लेकिन आज, आज आपकी इस ताकत को भी नष्ट किया जा रहा है. इतिहास के पन्नों से आपके नाम के हर अक्षर दागदार बनाये जा रहे हैं. आपकी जो सबसे बड़ी ताकत थी-महिला, उसे ही आपकी हत्या का हथियार बनाया जा रहा है और यह सब आप के किसी अनजानी मजबूरी के कारण आपकी सहमति से हो रहा है, या हो सकता है कि आपकी गर्दन पर तलवार रखकर पुष्यमित्र शुंगों ने आपको विषपान के लिए मजबूर कर दिया हो/ है! या हो सकता है कि जहर की आदत लग गयी हो आपको!!



धीमा जहर तो काफी पहले से ही दिया जाता रहा है, लेकिन जब से शुंगों का प्रिय दिल्ली की गद्दी पर बैठा तबसे जहर का डोज बढ़ा दिया गया है. अन्यथा तो आपके पहले कार्यकाल से ही जिसने भी बिहार को बारीकी से देखा होगा, यह जरूर देखा होगा कि समाज में साम्प्रदायिकता के विषबेल कैसे बोये जाते रहे, हाँ इधर दिल्ली में भी सत्तासीन होने के बाद यह सब आक्रामक हुआ-त्रिशूल तक बांटे जाने लगे. दंगों और तनावों की रफ़्तार बढ़ा.

लेकिन मेरे प्रिय नीतीश जी, आप उस जहर से इतना आसानी से इतिहास के पन्नों में दागदार कब्र के भीतर दफ़न होने वाले नहीं थे. इसलिए अब आपकी सबसे बड़ी ताकत को ही आपके विरुद्ध खड़ा किया जा रहा है और आप उसमें सहभागी हो रहे. बचाइये, बचाइये सत्ता बचाइये और इस बीच आपकी छवि बलात्कारियों के सरगना की बनती जा रही है/ बनायी जा रही है. आपको क्या लगता है यह विपक्षी कर रहे हैं, नहीं जनाब वे सांप कर रहे हैं, जिन्हें आपने अपने आस्तीन में अपनी राजनीति की शुरुआत से ही पाल रखा है-समता पार्टी के दिनों से ही.

मुजफफरपुर में बच्चियों से बलात्कार के मामले में चलिए मान लेते हैं कि आपकी सरकार के ऑडिट से सबकुछ खुला-लेकिन उसके बाद आपकी सरकार ने और धीमे जहर के प्रभाव में मदहोशी की हालत में आपने जो किया वह क्या है- एफआईआर में देरी, मुख्य सरगना ब्रजेश ठाकुर की जेल में मेहमाननवाजी, मुख्य गवाह एक बच्ची का गायब होना, एक से बढ़कर एक मामलों के उल्लेख के बावजूद उन मामलों में प्रभावी जांच नहीं होना, यह सब क्या है? सच में आप धीरे-धीरे मर रहे हैं नीतीश जी, वह नेता मर रहा है, जिसने अपनी छवि महिला-पक्षधर की बना रखी थी. और तो और आपके चाहने से और भाजपाइयों की मिलीभगत से जहर का एक और डोज मिल चुका है, कुछ चीजों की आदत हो जाती है, जो आपको हो गयी है. कल जब हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई है तब इसकी जांच कर रहे सीबीआई के एसपी का ही तबादला हो गया-किसे बचाया जा रहा है प्रभु!



पिछले कई महीनों से आपके यहाँ बलात्कारी सरेआम बलात्कार करते घूम रहे हैं. घर जाते डॉक्टर की पत्नी का सामूहिक बलात्कार हो या जहानाबाद, गया में बच्चियों से गैंगरेप. महिलाएं नंगी की जा रही हैं-कल ही आरा में राज्य और देश शर्मसार हुआ-पता नहीं आपको क्यों फर्क नहीं पड़ता है. लगता है धीमे जहर का असर तेज हो रहा है, आप अब तेजी से अपने अंत की पटकथा लिख रहे हैं. हर बार आप कोशिश करते हैं कि ऐसे मामलों में विपक्ष से जुड़े लोगों के नाम जाहिर किये जाएँ, बिहिया में आपने वही किया, जहनाबाद में भी किया था-लेकिन प्रभु सरकार आपकी है, इकबाल आपका घट रहा है. आपके साथी शुंगों का, भाजपाइयों का नाम आते ही आपकी पार्टी में शामिल शुंग और शुंग-मित्र बचाव में सक्रिय हो जाते हैं. हुजूर महिलाओं के लिए अच्छे काम का श्रेय आपको मिलेगा तो बलात्कार का यह कलंक दूसरों पर क्यों लगेगा भला! प्रभु मृत्यु के पूर्व भी चेतना आते हुए सुना, संभव हो तो अब धीमे जहर पीने से इनकार कर दीजिये, शायद कुछ शेष रह जाये इतिहास के पन्नों में आपके लिए अन्यथा सौ पवन वर्मा, डेढ़ सौ शैबाल गुप्ता और दो सौ वैसे साथी पत्रकार जो संस्थानों में बैठाये गये हैं आपके द्वारा,  भी मिलकर इन जहरीले नागों के विष से आपको बचा नहीं पायेंगे-आपके बाद शुंगों की सत्ता आयी तो कहीं वे उनके खेमे से आपका नाम खुरचते न दिखाई दें!

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