सत्ता के शीर्ष से है अपराधियों को संरक्षण: प्रधान सचिव का बयान बड़ा संकेतक



संतोष कुमार 

पटना के एक शेल्टर होम में एक नाबालिग लड़की और एक महिला कथित बीमारी से मृत पायी जाती है, जबकि उस शेल्टर होम में दो दिन पहले ही एक जांच टीम पहुँची थी, जिसने किसी संवासिन को बीमार नहीं पाया था. शेल्टर होम की संचालक मनीषा दयाल को गिरफ्तार किया गया है.  मुजफ्फरपुर शेल्टर होम में यौन उत्पीडन से प्रताड़ित जिन लड़कियों को मधुबनी के एक शेल्टर होम में शिफ्ट किया गया, उनमें से उत्पीड़न की मुख्य गवाह एक लड़की गायब हो गयी है. यह शेल्टर होम मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जद यू के एक प्रमुख नेता संजय झा के पीए का बताया जाता है. ये घटनाएँ बताती हैं कि शेल्टर होम के अपराधियों को कहीं ऊपर से संरक्षण मिला हुआ है, एक शेल्टर होम में चल रही सीबीआई जांच के बावजूद अपराधियों का हौसला बुलंद नहीं होता तो ऐसी घटनाओं को अंजाम देना मुश्किल है. वे निर्भीक हैं, इसका प्रमाण शीर्ष से मिल रहा है, सीधे मुख्यमंत्री के स्तर से. उधर देश भर से आ रही शेल्टर होम में यौन शोषण की घटनाओं में भाजपा के बड़े नेताओं से जुड़े लोगों के नाम भी आ रहे हैं. ब्रजेश ठाकुर के कांग्रेस कनेक्शन की भी बात की जा रही है.

पटना शेल्टर होम की गिरफ्तार संचालिका मनीषा दयाल प्रभावशाली नेताओं के साथ 

सत्ता के शीर्ष से इन अपराधियों के संरक्षण के अन्य प्रमाणों के साथ एक बानगी  6 अगस्त को भी मिली जब समाज कल्याण विभाग के सबसे बड़े पदाधिकारी प्रधान सचिव श्री अतुल प्रसाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ प्रेस कांफ्रेंस में अपने ही विभाग द्वारा दर्ज एफआईआर में उद्धरित बिंदुओं के विपरीत गलत बयान देते हैं। और कहते है कि TISS की रिपोर्ट मजफ्फरपुर बलिकागृह में यौन शोषण की कोई चर्चा तक नही थी। यह एक तरह से अपराधियों को दिया गया खुल्लम-खुल्ला सन्देश है कि सत्ता आपके साथ है. सच्चाई इसके ठीक विपरीत है. मजफ्फरपुर यौन शोषण को लेकर TISS द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट के आधार पर ही मजफ्फरपुर के तत्कालीन सहायक निदेशक बाल संरक्षण इकाई(ADCPU) देवेश कुमार शर्मा ने मुजफ्फरपुर महिला थाने में एफआईआर की थी। बल्कि उसकी लाईन को ही एफआईआर में कोट किया हुआ है।

TISS, मुम्बई की कोशिश टीम के सोसल ऑडिट रिपोर्ट के पेज नम्बर 52 में उल्लिखित है कि" The girls children in Muzaffarpur run by 'Seva Snkalp Evam Vikash Samiti' was both find by us to running highly questionable manner along with grave instance of violation that was reported by the residents. "Several girls reported about violence and being abused sexually". This is the very serious and need to be further investigation promptly. Immediate legal procedure must be followed to enquire into the charges and corrective measures be taken' इसी को आधार बनाकर प्राथमिकी 30/05/2018 को की गई जिसे 31/05/2018 को महिला थाना ने केस नवम्बर 33/18 को u/s 120(B)/376/34 IPC & 4/6/8/10/12 POCSO Act के तहत दर्ज किया।

मुख्यमंत्री के साथ मिलकर प्रेस कांफ्रेंस में बोले जाने वाले झूठ से ही बड़े अपराधियों को  शह मिल रहा है. यह अकारण नहीं है कि जेल में भी मुख्य अभियुक्त ब्रजेश ठाकुर के पास से 40 नंबर बरामद किये गये, उसमें से एक नम्बर एक मंत्री का भी है.

अब सवाल है कि इस मामले में दस से ज्यादा गिरफ्तारियां हो चुकी हैं,  जिसमे विभागीय पदाधिकारी से लेकर न्यायिक संस्थान बाल कल्याण समिति के सदस्य तक गिरफ्तार हो चुके है, जिला स्तरीय कई पदाधिकारी बर्खास्त है, माननीय पटना उच्च न्यायालय की निगरानी में सीबीआई की जांच चल रही है, माननीय सर्वोच्च न्यायालय स्वयं संज्ञान लेकर इस मुद्दे पर नजर रखा रहा है फिर भी प्रधान सचिव श्री अतुल प्रसाद प्रेस कान्फ्रेंस में मुख्यमंत्री  सहित जनता को झूठ बोलकर गुमराह क्यों करते है?

अभी तक सिर्फ और सिर्फ जिला स्तर के पदाधिकारियों पर बर्खास्तगी जैसी मामूली करवाई हुई है। यह समझने वाली बात है कि आरोपित ब्रजेश ठाकुर या उसके जैसे अन्य एनजीओ–माफिया की डीलिंग किससे, किस शर्त पर, किस स्तर पर, किसके साथ होती होगी? आनेवाले समय में सिर्फ सरकार ही नहीं सीबीआई को भी इस सवाल से जुझना होगा। हाल फिलहाल में एक सीनियर डिप्टी कलेक्टर एवं सहायक निदेशक बाल संरक्षण इकाई ने यह कह कर विभाग के सिंडीकेट की तरफ इशारा किया कि जब संचालक द्वारा एक बालगृह में व्यापक अनियमितता को लेकर बालगृह को बंद करने के लिए समाज कल्याण निदेशालय को अनुशंसा किया तो बालगृह तो बन्द नही हुआ पर उन्हें ही उस पद से हटवा दिया गया और हां उस बालगृह से कई बच्चे के गायब होने, यहां तक कि बच्चे की सन्देहास्पद स्थिति में हाल-फिलहाल में मौत होने के बाद भी सिंडीकेट के इशारे पर आज भी वह बालगृह चल रहा है।

यह एक नेक्सस है, इसमें सत्ता का शीर्ष भी शामिल है, इसलिए अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और न्याय की आशा क्षीण होती दिख रही है.

संतोष कुमार सामाजिक कार्यकर्ता हैं, इन्होने बिहार में शेल्टर होम की सीबीआई जांच और हाई कोर्ट मोनिटरिंग के लिए पीआईएल दाखिल किया है. 

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